मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में जीएसटी चोरी का एक बड़ा गिरोह पकड़ा गया है, जो बेरोजगार युवाओं के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग करके देशभर में फर्जी फर्में खड़ी कर रहा था। राज्य की एसआईटी ने 400 करोड़ रुपए से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा करते हुए गैंग के मास्टरमाइंड इखलाक और उसके साथी इत्तेफात आलम उर्फ दानिश कबाड़ी को गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे से कई अहम दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरे उत्तर भारत में फैल चुकी सबसे बड़ी जीएसटी फ्रॉड सिंडिकेट में से एक है।
एसआईटी ने मुरादाबाद और शाहजहांपुर के रहने वाले दो आरोपियों मोहम्मद इखलाक और उसके साथी इत्तेफात आलम उर्फ दानिश कबाड़ी को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से एक मोबाइल, आठ एटीएम कार्ड, तीन आधार कार्ड और पॉलिसी बाजार का कार्ड मिला है। टीम को इखलाक की डायरी से 535 फर्मों के विस्तृत रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिससे फर्जीवाड़े का आकार और भी बड़ा होने का संकेत मिलता है।
अधिकारियों ने बताया कि इस ठगी की परतें तब खुलीं जब राज्य कर विभाग ने 24 और 25 अक्टूबर को चेकिंग के दौरान लोहे से भरे दो ट्रक पकड़े। जांच में खुलासा हुआ कि जिन दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल फर्मों के पंजीकरण में किया गया था, उन्हीं नंबरों पर कुल 144 कंपनियाँ रजिस्टर्ड थीं। इस पर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर एसएसपी ने एसपी क्राइम सुभाषचंद्र गंगवार के नेतृत्व में 11 सदस्यीय एसआईटी गठित की।
पूछताछ में इखलाक ने स्वीकार किया कि उसने छह अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर चार से पाँच करोड़ की अवैध कमाई की है। उसके सहयोगी इत्तेफात आलम की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। दोनों को हिरासत में लेकर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है, जबकि गिरोह का सरगना अब भी गिरफ्त से बाहर है।
एसपी क्राइम सुभाषचंद्र गंगवार ने बताया कि पूरी साजिश दिल्ली के कॉल सेंटरों से शुरू हुई थी। वहाँ नौकरी और लोन का झांसा देकर बेरोजगारों का डेटा इकट्ठा किया जाता था। यही डेटा इखलाक को भेज दिया जाता था, जो फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराकर सेटअप तैयार कर देता था। प्रत्येक फर्जी फर्म के बदले कॉल सेंटर को 30 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक की राशि दी जाती थी।
फर्जी फर्मों के यूज़रनेम और पासवर्ड व्हाट्सऐप के जरिए गैंग से जुड़े सीए को भेजे जाते थे, जो इनके माध्यम से फर्जी ई-वे बिल तैयार करता था। इसी तरीके से सैकड़ों करोड़ की टैक्स चोरी को अंजाम दिया जा रहा था। एसआईटी अब इस सिंडिकेट के छह और सदस्यों की तलाश में जुट गई है और कई राज्यों में छापेमारी की तैयारी चल रही है।
