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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से हटाए जाएंगे सभी आवारा कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से हटाए जाएंगे सभी आवारा कुत्ते

दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में आवारा कुत्तों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। कोर्ट ने कहा है कि छह से आठ हफ्तों के भीतर दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद सहित एनसीआर के सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। यह आदेश जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनाया, जिन्होंने कुत्तों के हमलों को लेकर चिंता जताई और छोटे बच्चों और नवजातों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाएं तेज़

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बीजेपी नेता मेनका गांधी और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेता इस पर खुलकर बोल चुके हैं। वहीं, कई बॉलीवुड हस्तियों ने भी फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘अमानवीय’ बताया है।
पशु अधिकार संगठनों और PETA ने इस फैसले को 2023 के एनीमल बर्थ कंट्रोल नियमों के खिलाफ बताया है, जिनमें स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों को उन्हीं की जगह छोड़े जाने की बात कही गई है।

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या कितनी गंभीर है?

भारत में फिलहाल आवारा कुत्तों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन 2019 की 20वीं पशुधन गणना के अनुसार देशभर में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे। हालांकि, गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 6 करोड़ से भी अधिक बताई जाती है।

कुछ राज्यों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में आवारा कुत्तों की तादाद सबसे अधिक है।
दिल्ली विधानसभा की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या 8 लाख थी, जो अब 10 लाख से अधिक मानी जा रही है।

कुत्तों के हमले और रेबीज के मामले

हर साल देश में लाखों लोग कुत्तों के काटने का शिकार बनते हैं। 2024 में यह संख्या 1.74 करोड़ के आसपास थी।
भारत में हर साल 18,000 से ज्यादा लोग रेबीज से मौत के शिकार होते हैं।
एक बीमा कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में कुत्तों की वजह से हुए सड़क हादसे कुल जानवरों से हुई दुर्घटनाओं का 58% थे।

दुनिया ने कैसे सुलझाई आवारा कुत्तों की समस्या?

नीदरलैंड्स

नीदरलैंड्स को अक्सर आवारा कुत्तों की समस्या खत्म करने वाले देश के रूप में देखा जाता है। यहां सरकार ने कुत्तों की टैक्स नीति, नसबंदी, और टीकाकरण अभियान के साथ-साथ पेट ओनरशिप को बढ़ावा दिया। नतीजा यह रहा कि 1923 के बाद से यहां रेबीज का एक भी केस नहीं आया।

थाईलैंड

बैंकॉक में 2016 से 2023 के बीच सरकार ने मोबाइल क्लीनिक, सामुदायिक जागरूकता और डेटा ट्रैकिंग जैसे उपाय अपनाए। नतीजन, कुत्तों के काटने की घटनाएं घटीं और रेबीज पर नियंत्रण पाया गया।

भूटान

भूटान ने 100% टीकाकरण और नसबंदी के साथ ही देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया।

तुर्किये

तुर्किये में स्थिति उलट रही। वहां आक्रामक और बीमार कुत्तों को जहर देकर मारने का प्रावधान लागू किया गया। हालांकि, इस नीति की दुनियाभर में आलोचना हुई। 2004 में तुर्की ने नीदरलैंड्स की तर्ज पर कार्यक्रम शुरू किया था लेकिन भ्रष्टाचार और संसाधनों की कमी के चलते यह विफल रहा। 2024 में फिर नया विवादास्पद कानून लाया गया जिसमें कुछ कुत्तों को शेल्टर भेजने और अन्य को मारने की अनुमति दी गई।

फैसला अहम, लेकिन क्या है इसका व्यावहारिक समाधान?

सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक सख्त कदम है, लेकिन आवारा कुत्तों की समस्या केवल हटाने से हल नहीं होगी
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को चाहिए कि—

  • स्थायी शेल्टर तैयार करे,

  • स्टरलाइजेशन और टीकाकरण की गति तेज करे,

  • लोगों को कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रेरित करे,

  • और समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाए।

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