अल्मोड़ा। प्रसिद्ध मां नंदा देवी मेले की तैयारियाँ अल्मोड़ा में शुरू हो चुकी हैं। रविवार को मेला समिति नगर से लगभग सात किलोमीटर दूर रैलाकोट स्थित दुलागांव पहुंची, जहाँ मूर्ति निर्माण के लिए आवश्यक कदली (केले) वृक्षों का चयन परंपरागत विधियों के अनुसार किया गया।
दुलागांव में आयोजित बैठक में समिति पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए निर्णय लिया कि इस वर्ष भी मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के लिए कदली वृक्ष यहीं से लिए जाएंगे। ग्रामीणों ने मेले के आयोजन में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मेला कार्यक्रम की रूपरेखा:
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29 अगस्त 2025: मंदिर समिति पारंपरिक विधि-विधान के साथ दुलागांव जाकर कदली वृक्षों को औपचारिक निमंत्रण देगी।
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30 अगस्त 2025: ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच कदली वृक्षों को सज्जित कर मां नंदा देवी मंदिर परिसर लाया जाएगा।
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इसके बाद स्थानीय कारीगरों द्वारा मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। मेला 29 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा, जिसमें धार्मिक आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
“मेला त्योहार से भी बढ़कर है” – विनीता रावत
स्थानीय निवासी विनीता रावत ने कहा, “नंदा देवी मेला हमारे लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। इन दिनों पूरे गांव में रौनक और उमंग का वातावरण होता है।”
बैठक में व्यवस्थापक अनूप साह, सचिव मनोज सनवाल, मेला संयोजक अर्जुन सिंह बिष्ट, रवि गोयल (मूर्ति संयोजक) सहित समिति के कई सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण – रेवती, कमला देवी, भानू रावत, विक्रम सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह, और अन्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
