इंदौर: देश में हिंदी भाषा को लेकर एक नया जनआंदोलन आकार ले रहा है। इंदौर स्थित मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा चलाया जा रहा ‘हस्ताक्षर बदलो अभियान’ अब राष्ट्रव्यापी स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के तहत लाखों लोग अंग्रेजी या अन्य लिपियों को छोड़कर देवनागरी लिपि में हस्ताक्षर करने का संकल्प ले रहे हैं, जिससे भाषा के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना भी मजबूत हो रही है।
संस्थान के अनुसार, अब तक 35 लाख से अधिक नागरिक इस पहल से जुड़ चुके हैं। इंदौर से शुरू हुई यह मुहिम आज देश के विभिन्न राज्यों में हिंदी के प्रति नई जागरूकता पैदा कर रही है। अभियान का उद्देश्य केवल भाषा परिवर्तन नहीं, बल्कि मानसिक गुलामी से मुक्ति और भारतीय पहचान को सुदृढ़ करना है।
संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन अविचल का कहना है कि हस्ताक्षर किसी भी व्यक्ति की सबसे निजी पहचान होते हैं। अंग्रेजी में हस्ताक्षर करना आज भी औपनिवेशिक सोच को दर्शाता है, जबकि देवनागरी में हस्ताक्षर करना अपनी मातृभाषा और संस्कृति के प्रति आत्मसम्मान का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह आंदोलन हिंदी को केवल सरकारी भाषा न रखकर जन-जन की राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
साल 2017 में शुरू हुआ यह अभियान पिछले सात वर्षों से लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रसिद्ध पत्रकार और भाषाविद स्वर्गीय डॉ. वेदप्रताप वैदिक के मार्गदर्शन में इस पहल को नई दिशा मिली। वर्तमान में देशभर में 15 हजार से अधिक ‘हिंदी योद्धा’ स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को हस्ताक्षर बदलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शिक्षा जगत में भी इस अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अब तक 200 से अधिक महाविद्यालय और 20 से ज्यादा बड़े विश्वविद्यालय आधिकारिक तौर पर इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से चल रहे इस अभियान में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
