Jharkhand Air Ambulance Crash: झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक विमान हादसे में सात लोगों की जान चली गई। Redbird Airways Pvt. Ltd. द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट C90 एयर एम्बुलेंस रांची से दिल्ली के लिए मेडिकल इवैक्यूएशन फ्लाइट पर रवाना हुई थी, लेकिन उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद उसका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया। कुछ ही देर बाद विमान सिमरिया क्षेत्र के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त पाया गया।
रांची एयरपोर्ट से विमान ने शाम 7:11 बजे उड़ान भरी थी। अधिकारियों के अनुसार 7:30 बजे के आसपास एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। बाद में पता चला कि विमान चतरा जिले के कासरिया पंचायत क्षेत्र में क्रैश हो गया। हादसे में दो पायलट समेत सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
पोस्टमार्टम और जांच
सभी शवों को बरामद कर चतरा के सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर खराब मौसम को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन आधिकारिक निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
DGCA और AAIB की कार्रवाई
Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने बताया कि VT-AJV पंजीकरण संख्या वाला विमान मेडिकल इवैक्यूएशन मिशन पर था। उड़ान के दौरान कोलकाता एटीसी से संपर्क स्थापित हुआ, लेकिन वाराणसी के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में रडार और संचार संपर्क समाप्त हो गया।
दुर्घटना की जांच के लिए Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की टीम घटनास्थल पर भेजी गई है।
मरीज को ले जाया जा रहा था दिल्ली
रांची के देवकमल अस्पताल के अनुसार, लेटहार जिले के चांदवा निवासी 41 वर्षीय संजय कुमार को 65 प्रतिशत जलने की गंभीर चोटों के बाद बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया था। परिवार ने एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की थी और सोमवार शाम करीब 4:30 बजे मरीज अस्पताल से रवाना हुआ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
हादसे पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह जांच का विषय है कि प्रतिकूल मौसम में उड़ान की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की बात कही। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी घटना पर दुख जताया।
मृतकों की पहचान
हादसे में कैप्टन विवेक विकास भगत, कैप्टन सवराजदीप सिंह, मरीज संजय कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता, सचिन कुमार मिश्रा, अर्चना देवी और धुरु कुमार की जान गई।
डॉ. विकास कुमार गुप्ता के पिता ने बताया कि बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी थी। डॉक्टर का सात साल का बेटा है। वहीं, संजय कुमार के परिजनों ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि रांची में समुचित इलाज मिलता तो यह स्थिति शायद न बनती।
यह हादसा एक बार फिर एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा, मौसम आकलन और आपातकालीन उड़ानों के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएंगे।
