आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना बड़ी चुनौती बन गया है। लंबा ऑफिस टाइम, स्क्रीन पर घंटों काम और घर की जिम्मेदारियां—इन सबके बीच जिम या नियमित कसरत के लिए समय निकाल पाना हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिना जिम जाए भी स्वस्थ रहा जा सकता है? जवाब है—हाँ।
विशेषज्ञों के अनुसार, शारीरिक गतिविधि में लगातार कमी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है। डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी की समस्याएं और मोटापा कम उम्र में ही बढ़ते जा रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर और खराब मेटाबॉलिज्म जैसी समस्याएं भी इसी निष्क्रिय जीवनशैली से जुड़ी हैं।
हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि आप जिम नहीं जा पा रहे हैं, तो रोजमर्रा की गतिविधियों को ही अपनी फिटनेस का हिस्सा बना लें। घर के सामान्य काम—जैसे झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ करना, खाना बनाते समय खड़े रहना, सीढ़ियां चढ़ना या बागवानी—भी शरीर को सक्रिय रखते हैं और दिल व किडनी से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हल्की शारीरिक गतिविधि में रोजाना एक घंटे की बढ़ोतरी से असमय मृत्यु का खतरा 14 से 20 प्रतिशत तक घट सकता है। खासकर कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों के लिए यह बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। यह सिंड्रोम मोटापा, हाई ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप और किडनी संबंधी समस्याओं से जुड़ा होता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियां पैदा कर सकता है।
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों का भी मानना है कि हल्की गतिविधियां—जैसे रोजाना टहलना या बागवानी—दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। हर व्यक्ति के लिए तेज या कठिन व्यायाम संभव नहीं होता, लेकिन हल्की गतिविधियों को नियमित रूप से अपनाना एक व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि संतुलित आहार, नियमित हलचल और जरूरत पड़ने पर समय पर दवा—ये तीनों मिलकर गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसलिए अगर जिम के लिए समय नहीं मिल पा रहा, तो खुद को दोष देने के बजाय रोजमर्रा की छोटी-छोटी गतिविधियों को ही अपनी फिटनेस का आधार बना लें। यही छोटे कदम लंबे समय में बड़ी सेहत का आधार बन सकते हैं।
