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कुछ यूं बयां किए अरिंदम भट्टाचार्य ने जज़्बात, ‘मेरा दिल हमेशा गोलपोस्ट के अंदर ही रहेगा'”

कुछ यूं बयां किए अरिंदम भट्टाचार्य ने जज़्बात, ‘मेरा दिल हमेशा गोलपोस्ट के अंदर ही रहेगा'”

Arindam Bhattacharya Retires: भारतीय फुटबॉल जगत के एक और सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है। अनुभवी गोलकीपर अरिंदम भट्टाचार्य ने शनिवार को पेशेवर फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी हैं। लगभग दो दशकों तक आई-लीग, इंडियन सुपर लीग (ISL) और राष्ट्रीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले अरिंदम ने विदाई संदेश में अपने बचपन के सपनों, संघर्षों और उपलब्धियों को याद किया।

बचपन के सपने से शुरू हुआ सफ़र फुटबॉल 

35 वर्षीय अरिंदम भट्टाचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उनका फुटबॉल सफर बचपन के उस सपने से शुरू हुआ था, मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के लिए खेलना और बाइचुंग भूटिया जैसे दिग्गजों का सामना करना। उन्होंने कहा कि अब उनका शरीर संकेत दे रहा है कि रुकने का वक्त आ गया है, लेकिन दिल हमेशा “गोलपोस्ट के भीतर” ही रहेगा।

यादे सीख और दोस्ती सबसे बड़ी उपलब्धि

अपने कोचों, टीम साथियों, प्रशंसकों और परिवार के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने लिखा कि “दो दशक बाद जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो ट्रॉफियां, जख्म और संघर्ष सब कहानी कहते हैं। लेकिन इन सबसे बढ़कर यादें, सीख और दोस्ती ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं।”

चर्चिल ब्रदर्स से करियर की शुरुवात 

टाटा फुटबॉल अकादमी से प्रशिक्षित अरिंदम ने सीनियर करियर की शुरुआत चर्चिल ब्रदर्स से की थी। महज़ 19 वर्ष की उम्र में उन्होंने आई-लीग खिताब अपने नाम किया। इसके बाद वे पुणे सिटी एफसी, बेंगलुरु एफसी, मुंबई सिटी, और मोहन बागान जैसे बड़े क्लबों के लिए खेले। उन्होंने 2019-20 सीजन में आईएसएल ट्रॉफी जीती और अगले सत्र में ‘गोल्डन ग्लव’ अवॉर्ड हासिल किया। साल 2021 में ईस्ट बंगाल की कप्तानी करना उनके लिए विशेष पल रहा—क्योंकि यह उनके परिवार का भी सपना था।

अंतरराष्ट्रीय खेलों पर एक नज़र 

अरिंदम ने भारत की ओर से पाँच अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और राष्ट्रीय टीम के कई शिविरों का हिस्सा रहे। सुब्रतो कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्हें कोच स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन ने भारत की अंडर-19 टीम में चुना, जहाँ उन्होंने श्रीलंका और म्यांमार के खिलाफ खेला। 2009 में ढाका में आयोजित सैफ चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-23 टीम से अफगानिस्तान के खिलाफ पदार्पण किया।

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