गाजियाबाद: शहर के कविनगर क्षेत्र में किराये की कोठी से संचालित किए जा रहे फर्जी दूतावास मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपी ने खुद को माइक्रोनेशन का प्रतिनिधि बताकर अब तक कम से कम 25 लोगों को राजदूत बनाने का झांसा दिया और उनसे भारी रकम वसूल की।
एसटीएफ की जांच में 20 पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें विदेशी माइक्रोनेशन में राजनयिक पद दिलाने के नाम पर 50 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक की रकम ली गई। ठगी को विश्वसनीय दिखाने के लिए आरोपियों की ओर से कूरियर के माध्यम से फर्जी दस्तावेज, पहचान पत्र और वाहनों की नंबर प्लेट तक भेजी जाती थीं।
एसटीएफ नोएडा के एसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस केस में मुख्य आरोपी हर्षवर्धन जैन के अलावा उसके ससुर और साले को भी सह-आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने भी इस प्रकरण से जुड़ी जानकारी मांगी थी, जिसे संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध करा दिया गया है।
गौरतलब है कि 23 जुलाई 2025 को एसटीएफ ने कविनगर स्थित फर्जी दूतावास पर छापा मारकर हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार किया था। उस पर माइक्रोनेशन का राजदूत बनकर नौकरी और पद दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। जांच में उसके विदेशी संपर्कों और 200 से अधिक विदेश यात्राओं की जानकारी भी सामने आई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने केवल एनसीआर ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कारोबारियों को भी अपना निशाना बनाया। फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के लिए वह इंदिरापुरम स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस का इस्तेमाल करता था, जहां से पहचान पत्र और अन्य कागजात छपवाए जाते थे। प्रिंटिंग के बाद डिजिटल डेटा को तुरंत डिलीट कर दिया जाता था।
एसटीएफ ने सेबोरगा, वेस्ट आर्कटिक और लास्टलैंड जैसे माइक्रोनेशन से भी संपर्क किया है। इनमें से वेस्ट आर्कटिक ने आरोपी को सभी पदों से हटाने की पुष्टि की है, जबकि लास्टलैंड की ओर से जवाब प्राप्त हुआ है। अधिकारियों के अनुसार माइक्रोनेशन ऐसे स्वघोषित समूह होते हैं, जिन्हें किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था की मान्यता प्राप्त नहीं होती।
