AI Based Content Rules: डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद ये नियम 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। अब एआई की मदद से तैयार किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, इन नियमों का मकसद इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकार का मानना है कि जनरेटिव एआई के दुरुपयोग से फर्जी खबरें, पहचान की चोरी और चुनावी हेरफेर जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं, जिन पर नियंत्रण जरूरी है।
डिजिटल लेबल अब अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत, एआई से तैयार कंटेंट पर “AI Generated” या इसी तरह का स्पष्ट स्टैम्प लगाना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी नेता का एआई-निर्मित भाषण वाला वीडियो साझा किया जाता है, तो उसे बिना लेबल के पोस्ट नहीं किया जा सकेगा।
एक दिन पहले आयोजित एआई सम्मेलन में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर न्यूट्रिशन लेबल होता है, वैसे ही डिजिटल सामग्री पर भी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए कि वह असली है या एआई से बनाई गई है।
मेटाडेटा में होगा ‘डिजिटल डीएनए’
सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि हर एआई कंटेंट के मेटाडेटा में उसके निर्माण से जुड़ी जानकारी दर्ज रहे। इसमें यह विवरण होगा कि सामग्री कब बनाई गई, किस एआई टूल से तैयार हुई और सबसे पहले कहां अपलोड की गई। जांच एजेंसियां जरूरत पड़ने पर इसी तकनीकी जानकारी के आधार पर मूल स्रोत तक पहुंच सकेंगी।
लेबल से छेड़छाड़ पर कड़ी कार्रवाई
एआई वॉटरमार्क या मेटाडेटा हटाना अब गैर-कानूनी माना जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे तकनीकी उपाय लागू करने होंगे, जिससे लेबल हटाने की कोशिश होने पर कंटेंट स्वतः ब्लॉक या डिलीट हो सके।
3 घंटे में हटेगा गैर-कानूनी कंटेंट
आईटी नियमों में संशोधन के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के तीन घंटे के भीतर आपत्तिजनक या गैर-कानूनी सामग्री हटानी होगी। पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी। इससे प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही काफी बढ़ गई है।
यूजर और प्लेटफॉर्म दोनों जिम्मेदार
अब कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को यह घोषित करना होगा कि सामग्री एआई से बनाई गई है या नहीं। यदि बिना खुलासे के एआई कंटेंट प्रकाशित होता है, तो जिम्मेदारी सिर्फ यूजर ही नहीं बल्कि संबंधित प्लेटफॉर्म की भी तय की जाएगी।
डीपफेक पर सख्ती
डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरे की हूबहू नकल कर भ्रामक सामग्री तैयार की जाती है। बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री, धोखाधड़ी या किसी की पहचान का दुरुपयोग करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इन नियमों से डिजिटल स्पेस में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को असली और नकली कंटेंट के बीच फर्क समझने में मदद मिलेगी।
