दिल्ली- दिल्ली कार विस्फोट मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जवाद अहमद सिद्दीकी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन हिंदू भूमि मालिकों की जमीन पर कब्जा कर लिया, जिनकी मौत कई दशक पहले हो चुकी थी।
ईडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के मदनपुर खादर क्षेत्र में स्थित कई भूखंड मूल रूप से स्थानीय हिंदू परिवारों के नाम पर दर्ज थे। लेकिन उनके निधन के बाद तैयार किए गए नकली दस्तावेजों के आधार पर इन जमीनों को सिद्दीकी और उनसे जुड़े संगठनों के नाम ट्रांसफर करा दिया गया। बताया जा रहा है कि अल फलाह विश्वविद्यालय का नाम इसी फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़े आतंकी नेटवर्क में भी सामने आया था, जहां से पिछले दिनों तीन डॉक्टरों को दिल्ली धमाके की साजिश में गिरफ्तार किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 792 वाली जमीन को तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन नामक ट्रस्ट के नाम पर चढ़ाने के लिए एक जाली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) तैयार की गई। हैरानी की बात यह है कि जीपीए पर जिन व्यक्तियों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगे हैं, उनकी मौत 1972 से 1998 के बीच ही हो चुकी थी। इसके बावजूद 7 जनवरी 2004 की तारीख डालकर दस्तावेज बनाया गया और बाद में इसी आधार पर जमीन का पंजीकरण भी करवा लिया गया।
ईडी ने 18 नवंबर को जवाद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह एजेंसी की हिरासत में है और उससे जुड़े लेन-देन, संपत्ति हस्तांतरण और संदिग्ध कागजातों की कड़ी दर कड़ी जांच की जा रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, सिद्दीकी ने कथित रूप से मृत व्यक्तियों के नाम पर बने जाली जीपीए के जरिए बड़े पैमाने पर जमीन हड़पने का नेटवर्क तैयार किया था। जीपीए ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें एक व्यक्ति को दूसरे की ओर से संपत्ति से जुड़े निर्णय लेने और लेन-देन करने का अधिकार मिलता है—लेकिन इस मामले में इसका दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया गया।
