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क्या योगी जी ने पासा पलट दिया?

क्या योगी जी ने पासा पलट दिया?

अजय दीक्षित
आजकल प्रिंट व दृश्य श्रव्य मीडिया में काफी चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध जो पार्टी में कुछ लोग प्रचार कर रहे थे उसे योगी  ने दुकानों में नाम लिखने की घोषणा के बाद उनकी स्थिति बहुत मजबूत हो गई है । सावन के महीने पर कावड़ को ले जाने वालों को रास्ते में शुद्ध हिन्दू भोजन व फल आदि मिल सके, इसलिए योगी जी ने आदेश निकला कि रास्ते की हर दुकान अपने मालिक को कर्मचारियों के नाम बाहर बोर्ड लगाकर प्रकट करेंगे । अभी बहुत से मुस्लिमों ने हिन्दू देवी-देवताओं के नाम दुकान, होटल, ढावे का नाम रख लिया है । ठेले वालों को भी अपना नाम बतलाना होगा । हमारे शास्त्रों में ऐसी शुद्धता का कोई उल्लेख नहीं है क्योंकि हमारे शास्त्र हजारों साल पुराने हैं जबकि इस्लाम 2000 साल पुराना ही है । गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि वर्ण मैंने बनाये हैं । कालांतर में ये जाति बन गये और जन्म के आधार पर निर्धारित होने लगे । पहले ये वर्ण कर्म पर आधारित थे । अनेक संत जाति के हिसाब से सबसे नीचे की सीढ़ी के हैं । कबीर जुलाहा थे । रहीम मुसलमान थे । रसखान और जायसी इस्लाम को मानने वाले थे । लोकसभा में भाजपा को कम सीटें मिली और इण्डिया गठबंधन बाजी मार गया । अभी सात राज्यों की 11 सीटों में भाजपा मात्र दो सीटें जीत पाई? उसे दो सीटों का नुकसान हुआ । अब उत्तर प्रदेश में उप चुनाव होने वाले हैं । बहुत से विधायक सांसद बन गये हैं ।

मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य खुलेआम शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं । पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें मिलने का समय दिया । राजनैतिक पण्डितों का कहना है कि यह ठीक नहीं है । क्योंकि वे योगी जी की आज्ञा के बिना केन्द्रीय नेतृत्व से नहीं मिल सकते । केशव प्रसाद मौर्य और एक उप मुख्यमंत्री तथा एक मंत्री योगी द्वारा आहूत मंत्रिमंडल की बैठक में भाग नहीं ले रहे हैं । यह राजनैतिक पण्डितों का कहना है कि मर्यादा के विरुद्ध है । अब योगी अपने आप तो इन तीनों को मंत्रिमंडल से हटा नहीं सकते बिना केन्द्रीय नेतृत्व की स्वीकृति के । केन्द्रीय नेतृत्व का मतलब अब मोदी हैं ।

केशव प्रसाद मौर्य भूल गये कि 2022 के विधानसभा चुनाव में वे अपनी सीट से हार गये थे । वह भी एक महिला से । उत्तर प्रदेश में लोकसभा या उप चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन पर जो भी चर्चा हो वह मीडिया में नहीं आनी चाहिए । यह पार्टी का आंतरिक मामला है ।
असल में बेरोजग़ारी, महंगाई और युवाओं की निराशा हार का मुख्य कारण हो । इसका विश्लेषण सी.एस.डी.एस. कर सकती है या कोई समाज शास्त्री या योग्य विद्वान असल में हाल में योगी जी ने अपने दो फैसले बदल दिये थे । लखनऊ व पंतनगर में अवैध कॉलोनियों में बुलडोजर चलाने की घोषणा को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया

इसके बाद अध्यापकों की डिजिटल उपस्थिति के नियम को भी दो महीने के लिए स्थगित करना पड़ा । इससे भाजपा के अंदरुनी लोग और अन्य पार्टी के लोग इसे योगी जी की कमजोरी मानने लगे । परन्तु योगी जी उसी दम-खम से काम कर रहे हैं जैसे पहले दुकानों पर नाम लिखने की उनकी घोषणा का कई सदस्यों ने स्वागत किया है । उत्तराखण्ड में यह लागू हो गया है । हरियाणा, राजस्थान,मध्य प्रदेश भी इस नियम कोलागू कर रहे हैं । कर्नाटक में जब भाजपा की सरकार थी तो उसने यह घोषणा की थी कि मंदिरों के बाहर मुसलमान पूजा का सामान नहीं बेचेंगे । बनारस के मंदिरों में भगवान को जो वस्त्र पहनाये जाते हैं वे प्राय: मुसलमान महिलाएं बनाती हैं । प्रभु रामकी मूर्ति स्थापना वाले दिन मुसलमान वादी को भी निमंत्रण भेजा गया था । कावड़ यात्रा के दौरान शुद्धता आवश्यक है । परन्तु भारत ने सेकुलर, सोशलिस्ट, सर्व धर्म समभाव को मंत्र मान लिया है । अत: मुसलमानों द्वारा फल यदि धो लिये जाएं तो वे अशुद्ध नहीं होते । खाने की बात और है । मोदी जी को हस्तक्षेप करके लोगों को आश्वस्त करना चाहिए ।

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