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कथित फांसी घर विवाद में पूर्व CM केजरीवाल और सिसोदिया की बढ़ीं मुश्किलें, विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट पेश

कथित फांसी घर विवाद में  पूर्व CM केजरीवाल और सिसोदिया की बढ़ीं मुश्किलें, विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट पेश

Fansi Ghar Controversy: दिल्ली विधानसभा परिसर में कथित फांसी घर को लेकर चल रहा विवाद अब सियासी और कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और पूर्व डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सदन में पेश कर दी है, जिसमें चारों पूर्व पदाधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने रिपोर्ट रखते हुए बताया कि अगस्त 2025 में विधानसभा में इस मुद्दे पर लगातार तीन दिन चर्चा हुई थी। सदन की भावना को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने पूरे प्रकरण की जांच समिति को सौंप दी थी।

रिपोर्ट के अनुसार 9 अगस्त 2022 को विधानसभा परिसर में जीर्णोद्धार के बाद जिस स्थान को फांसी घर बताकर अनावरण किया गया था, वहां उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन स्पीकर रामनिवास गोयल ने की थी, जबकि मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला भी कार्यक्रम में शामिल रहे। इस आयोजन को लेकर बड़े स्तर पर प्रचार हुआ और आम लोगों की भी भारी भीड़ उमड़ी थी।

हालांकि फरवरी 2025 में नई विधानसभा के गठन के बाद जब भवन को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब जांच में अहम तथ्य सामने आए। राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त रिकॉर्ड में खुलासा हुआ कि जिस स्थान को फांसी घर बताया गया, वह वास्तव में टिफिन रूम था। किसी भी आधिकारिक ऐतिहासिक दस्तावेज में वहां फांसी घर होने का उल्लेख नहीं मिला।

समिति ने चारों पूर्व पदाधिकारियों को लिखित जवाब और व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए 13 और 20 नवंबर 2025 को समन जारी किए थे। लेकिन समिति का आरोप है कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर वे लगातार पेश होने से बचते रहे, जबकि अदालत की ओर से कोई स्थगन आदेश नहीं था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रवैया विधानसभा और उसकी समितियों के अधिकारों का उल्लंघन है। समिति ने लोकसभा और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि संसदीय समितियों को गवाही के लिए बुलाने और उपस्थिति सुनिश्चित करने का संवैधानिक अधिकार है। इसी आधार पर चारों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

साथ ही समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि फांसी घर से जुड़े मूल तथ्यों की जांच अभी जारी रहेगी और इस पर अगली रिपोर्ट आगामी सत्र में पेश की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को अवगत कराया कि बुधवार को रिपोर्ट पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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