अरकु (आंध्र प्रदेश)। आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध अरकु घाटी में उत्पादित कॉफी को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार मिलकर यहां कॉफी उत्पादन, गुणवत्ता सुधार और विपणन को मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि आदिवासी किसानों को बेहतर आय सुनिश्चित की जा सके।
अरकु क्षेत्र में कॉफी की खेती को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। उन्नत किस्म के पौध, जैविक खेती को बढ़ावा और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही किसानों को प्रशिक्षण देकर उत्पादन की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
हाल ही में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा आयोजित एक विशेष मीडिया भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने मुसरी गांव स्थित कॉफी नर्सरी का दौरा किया। यहां कॉफी पौध तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों की जानकारी दी गई।
केंद्र सरकार की ओर से कॉफी उत्पादकों को आर्थिक सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और ब्रांडिंग समर्थन भी दिया जा रहा है। “अरकु वैली कॉफी” को प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है, ताकि इसे देश और विदेश के बाजारों में मजबूती से उतारा जा सके।
स्थानीय किसानों का कहना है कि इन पहलों से उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और उनके उत्पाद को नई पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से अरकु कॉफी आने वाले समय में भारत की प्रमुख कॉफी ब्रांड्स में शामिल हो सकती है।
