नोएडा- दिल्ली पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा में सात वर्ष पूर्व नर्सरी की एक छात्रा के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश-2 (पॉक्सो अधिनियम) की अदालत ने स्कूल के स्विमिंग पूल में कार्यरत लाइफगार्ड चंडीदास को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर ₹24,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
अदालत ने स्कूल का संचालन करने वाली डीपीएस सोसाइटी को भी जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़िता और उसके परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे एक माह के भीतर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से भुगतान करना होगा।
घटना का विवरण
12 जुलाई 2018 को ग्रेटर नोएडा के गामा-2 स्थित स्कूल में स्वीमिंग क्लास के दौरान यह घटना सामने आई थी। बच्ची ने घर लौटने पर अपनी मां से असहजता और दर्द की शिकायत की, जिसके बाद मेडिकल जांच में दुर्व्यवहार की पुष्टि हुई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया
शुरुआत में स्कूल प्रशासन ने घटना को नकारा, लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर चार्जशीट दाखिल की। सात वर्षों तक चले मुकदमे में 12 गवाहों की गवाही हुई। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना।
विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि स्कूल परिसर में हुई इस घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश जाए। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने की बात कहते हुए नरमी की अपील की।
सह-आरोपियों पर भी कार्रवाई
अदालत ने इस मामले में जांच अधिकारियों सीता सिंह और रश्मि चौधरी को सह-आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ समन जारी करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पाया कि इन अधिकारियों ने तत्कालीन प्रधानाचार्य रेणु चतुर्वेदी और शिक्षिका हीना लोहानी को बचाने की कोशिश की, जबकि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद थे।
अब इस मामले में नए सिरे से कार्यवाही शुरू की जाएगी और गवाहों को फिर से बुलाया जाएगा। अदालत ने इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भी भेजने का निर्देश दिया है।
