नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित बहुचर्चित अवसंरचना परियोजना को मंजूरी दे दी है। कोलकाता स्थित पूर्वी जोनल बेंच ने कहा कि परियोजना को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और फिलहाल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
यह आदेश एनजीटी चेयरपर्सन प्रकाश प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने पारित किया।
किन परियोजनाओं को मिली स्वीकृति?
मंजूरी प्राप्त मेगा परियोजना में शामिल हैं-
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अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
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प्रस्तावित टाउनशिप एवं क्षेत्रीय विकास योजना
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450 MVA क्षमता का गैस एवं सौर आधारित विद्युत संयंत्र
परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को पहले आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नियमों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी गई थी। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कहा कि पूर्व सुनवाई के दौरान जिन बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई थी, उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने संबोधित किया है।
पर्यावरणीय सुरक्षा पर विशेष निर्देश
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। पर्यावरणीय स्वीकृति में विशेष संरक्षण उपायों का उल्लेख किया गया है, जिनमें—
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लेदरबैक समुद्री कछुओं के घोंसला स्थलों की सुरक्षा
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निकोबार मेगापोड, खारे पानी के मगरमच्छ और निकोबार मकाक जैसे संवेदनशील वन्यजीवों का संरक्षण
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मैंग्रोव पुनर्स्थापन और कोरल ट्रांसलोकेशन
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शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के हितों की रक्षा
ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया कि तटरेखा की प्राकृतिक संरचना में किसी प्रकार का बदलाव न किया जाए और रेतीले समुद्र तट सुरक्षित रखे जाएं।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
ग्रेट निकोबार द्वीप हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के समीप स्थित है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का प्रमुख मार्ग है। प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल से भारत को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क में अधिक मजबूत उपस्थिति मिल सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे के विकास से समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को भी मजबूती मिलेगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका और सुदृढ़ हो सकती है।
उठे पर्यावरणीय सवाल
परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय हलकों में पहले भी चिंता जताई गई थी। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी समेत कई पर्यावरणविदों ने आशंका जताई थी कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और कोरल रीफ को संभावित नुकसान से द्वीप की पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, एनजीटी ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरणों को पर्यावरणीय शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। ट्रिब्यूनल ने विकास और संरक्षण के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता दोहराई है।
