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नोएडा पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल, हाईकोर्ट ने रिमांड आदेश रद्द कर आरोपी को दी राहत

नोएडा पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल, हाईकोर्ट ने रिमांड आदेश रद्द कर आरोपी को दी राहत

Supreme Court On Software Engineer Death: ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत से जुड़े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा पुलिस की कार्रवाई को गंभीर मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को आधार बनाते हुए एमजेड बिजटाउन के निदेशक अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो की क्लॉज-13 का पालन नहीं किया गया, जो कानूनन अनिवार्य है। कोर्ट ने इसे न केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ माना।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस को तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना होता है। यदि गिरफ्तारी की वैधानिक शर्तें पूरी नहीं की जातीं, तो ऐसी हिरासत को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

याचिकाकर्ता अभय कुमार की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने उन्हें बिना जरूरी कानूनी औपचारिकताओं के गिरफ्तार किया। न तो गिरफ्तारी मेमो की प्रति उपलब्ध कराई गई और न ही उसमें दर्ज क्लॉज-13 का पालन किया गया।

अभय कुमार के अधिवक्ता रिंकू तोंगड़ और राजीव तोंगड़ ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मिहिर राजेश बनाम महाराष्ट्र राज्य फैसले के तहत गिरफ्तारी के समय जिन नियमों का पालन जरूरी है, उन्हें नजरअंदाज किया गया।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला हालिया उमंग रस्तोगी बनाम राज्य सरकार फैसले से पूरी तरह आच्छादित है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, वरना ऐसी कार्रवाई कानून की कसौटी पर नहीं टिक सकती।

रिमांड आदेश भी रद्द

कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 20 और 21 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेशों को भी अवैध करार दिया। अदालत ने साफ कहा कि जब गिरफ्तारी ही कानून के अनुरूप नहीं है, तो उसके आधार पर दिया गया रिमांड आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति का इंतजार किए बिना इसे तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए, ताकि अभय कुमार की रिहाई में कोई देरी न हो।

सह-आरोपियों को पहले ही मिल चुकी राहत

गौरतलब है कि इस मामले में लोटस ग्रीन के दो कर्मचारियों रवि बंसल और सचिन करनवाल को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि निर्मल सिंह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को भी निरस्त किया जा चुका है। इससे पहले निचली अदालत ने अभय कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और अगली सुनवाई 13 फरवरी तय की गई थी।

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