देहरादून। हरिद्वार कुंभ को ऐतिहासिक और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने केंद्र से 3472 करोड़ रुपये का विशेष बजट मांगा है, ताकि 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तारित इस आयोजन को भव्य और सुविधाजनक बनाया जा सके।
17 से 21 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
इस बार कुंभ मेला जनवरी से अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। प्रशासन का अनुमान है कि इस अवधि में 17 से 21 करोड़ श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच सकते हैं। सिर्फ शाही स्नान के दौरान ही 1.5 से 2 करोड़ लोगों की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
2021 में कोविड-19 की पाबंदियों के बावजूद 66.25 लाख श्रद्धालुओं ने शाही स्नान में भाग लिया था।
घाट विस्तार और भीड़ प्रबंधन के लिए बड़ा प्लान
वर्तमान में हरिद्वार में 12.62 किमी लंबे घाट हैं, जिनकी अधिकतम क्षमता प्रति 24 घंटे में 1.39 करोड़ श्रद्धालुओं की है।
घाटों को 5.68 किमी और बढ़ाने की योजना है, जिसकी लागत 110 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस विस्तार के बाद घाटों की कुल क्षमता बढ़कर 1.78 करोड़ श्रद्धालु प्रति दिन हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त, 2.5 किमी अस्थायी घाट भी प्रस्तावित हैं।
सड़कें और पुल: बेहतर पहुंच के लिए बुनियादी ढांचे का विकास
78.38 किमी अस्थायी सड़कों और
22 अस्थायी पुलों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
यह कदम भीड़भाड़ को कम करने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निकासी के लिए अहम माना जा रहा है।
जल आपूर्ति और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस
वर्तमान में कुंभ क्षेत्र में 132 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी उपलब्ध है, जबकि अनुमानित मांग 164 एमएलडी है।
इस अंतर को पाटने के लिए प्रस्तावित हैं:
17 नए ट्यूबवेल,
3 ओवरहेड टैंक,
50.5 किमी पुरानी पाइपलाइन का नवीनीकरण,
49 फायर हाइड्रेंट,
इन योजनाओं पर 99.25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
साथ ही:
220 किमी अस्थायी पाइपलाइन,
3000 सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट,
300 अस्थायी फायर हाइड्रेंट लगाने के लिए 56.37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रस्तावित किया गया है।
