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राजस्व वसूली, गैस वितरण, अतिक्रमण और एसआईआर की प्रगति की समीक्षा, जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश

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30 अप्रैल तक 79 राजस्व चौकियों का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश

कार्यों में गति लाने हेतु समस्त राजस्व न्यायालयों तथा पटवारी चौकियों को एक माह में कंप्यूटर तथा लैपटॉप उपलब्ध कराएं- जिलाधिकारी

जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में ली राजस्व संवर्धन की मासिक बैठक

पौड़ी। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित मासिक स्टाफ बैठक में जनपद के राजस्व संवर्धन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गयी। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व प्राप्ति में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी तथा सभी विभाग निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप वसूली सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े प्रकरणों का निस्तारण पारदर्शिता के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए, ताकि आमजन को शासन की सेवाओं का त्वरित लाभ मिल सके।

जिलाधिकारी ने राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुए सभी उपजिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को वसूली में अपेक्षित प्रगति लाने तथा लंबित वादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से पुराने लंबित राजस्व वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया। साथ ही तहसीलदारों को वादों के शीघ्र निस्तारण तथा उपजिलाधिकारियों को तहसीलदार न्यायालयों के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि अतिरिक्त प्रभार वाले उपजिलाधिकारी सप्ताह में कम से कम एक दिन संबंधित तहसील में बैठकर जनसमस्याओं का समाधान करें। उन्होंने स्थायी निवास, जाति एवं ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों का रेंडम सत्यापन कर त्रुटि पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में मुख्यमंत्री राहत कोष के लाभार्थियों की अद्यतन रिपोर्ट तैयार करने, आवश्यकता अनुसार आपदा उपकरणों की मांग भेजने तथा बड़े बकायेदारों से वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, अतिक्रमण हटाने, खाता-खतौनी, दाखिल-खारिज एवं चरित्र सत्यापन की प्रक्रियाओं में तेजी लाने को कहा गया। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन अधिकारी को चौबट्टाखाल, लैंसडाउन एवं धुमाकोट में वुड कटर उपलब्ध कराने तथा उपजिलाधिकारी कोटद्वार को खराब पड़े इंडस्ट टॉवर के ढांचे को ध्वस्त करने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने बताया कि दैवीय आपदा के क्षतिग्रस्त जनपद की 63 राजस्व उप निरीक्षक चौकियों की मरम्मत हेतु 3.25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गयी है। उक्त धनराशि चौकियों की मरम्मत हेतु सम्बन्धित उप जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराते हुये चौकियों की मरम्मत अविलम्ब कराये जाने के निर्देश दिये गये है। उन्होंने बताया कि उक्त के अतिरिक्त जिला कार्यालय से परिषद को राजस्व उप निरीक्षक चौकियों के प्रेषित आंगणनों के सापेक्ष तहसील रिखणीखाल की 14 एव तहसील लैन्सडौन की 02 चौकियों के मरम्मत हेतु धनराशि स्वीकृत हुई है। उक्त के क्रम में जिलाधिकारी ने राजस्व चौकियों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए निर्माणदायी संस्था को तत्काल एस्टीमेट तैयार कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी माह में कार्यों की गति बढ़ाते हुए 30 अप्रैल तक सभी निर्धारित निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पटवारी अपने निर्धारित स्थान पर बैठेंगे, जिससे राजस्व कार्य सुचारु रूप से संपादित हों।

इसके साथ ही उन्होंने तहसीलों में संसाधनों की उपलब्धता और डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने बताया कि डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 402 राजस्व न्यायालयों के कम्प्यूटरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद गढ़वाल के 41 राजस्व न्यायालयों के लिए प्रति न्यायालय एक कंप्यूटर, एक प्रिंटर एवं एक यूपीएस की व्यवस्था हेतु की धनराशि स्वीकृत की गयी है। स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 41 कंप्यूटर क्रय कर जनपद की सभी तहसीलों को वितरित कर दिए गए हैं, जिससे राजस्व न्यायालयों के कार्यों में दक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि राजस्व परिषद द्वारा जनपद गढ़वाल के 268 फील्ड कार्मिकों को शासकीय कार्यों के प्रभावी संपादन हेतु प्रति कार्मिक लैपटॉप उपलब्ध कराने के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत लैपटॉप क्रय हेतु निविदा प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने बताया कि शेष तहसीलों में भी एक माह में शीघ्र कंप्यूटर उपलब्ध कराते हुए उनकी स्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारू एवं प्रभावी ढंग से किया जा सके तथा उनमें गति लायी जा सके। वहीं उन्होंने तहसीलों में निर्माण कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि जहां जो मरम्मतीकरण का कार्य होना है उसे तत्काल कराएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनता की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ जनसमस्याओं का समाधान करने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट अथवा महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की आवश्यकता है, तो संबंधित अधिकारी उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करते हुए प्रस्तुत करें, ताकि आवश्यकतानुसार ऐसे प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल कर विकास कार्यों को गति दी जा सके। साथ ही उन्होंने निर्माणाधीन बड़े कार्यों का नियमित निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने फॉर्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत तहसीलदारों एवं पटवारियों को निर्देशित किया कि सभी लंबित प्रकरणों का सत्यापन 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी तथा नियमित समीक्षा करते हुए प्रगति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिजली, पानी एवं टेलीफोन के बिलों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की देरी से बचते हुए सभी देयकों का नियमित निस्तारण करने पर भी जोर दिया।

प्रशासनिक कार्यक्षमता को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने ई-ऑफिस प्रणाली की अनिवार्य उपयोगिता पर विशेष बल दिया। उन्होंने जनपद की समस्त तहसीलों को अपनी तकनीकी स्थिति में सुधार करने के कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिला मुख्यालय के साथ होने वाला समस्त आधिकारिक पत्राचार अब केवल ई-ऑफिस पोर्टल के माध्यम से ही संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कागजी कार्यवाही को कम करना और पत्रावलियों के आवागमन में गतिशीलता लाना है।

जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग को कोटद्वार स्थित कौड़िया चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर वाहनों की आवाजाही की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही वाहन पंजीकरण शुल्क से संबंधित अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। खनन विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने लक्ष्य के अनुरूप राजस्व वसूली में तेजी लाने तथा लंबित देयों की वसूली हेतु तत्काल आरसी जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले दो से तीन दिनों के भीतर वसूली में उल्लेखनीय प्रगति लाने को कहा। उन्होंने राज्य कर विभाग की श्रीनगर एवं कोटद्वार इकाइयों को भी राजस्व लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उप निबंधक को स्टांप संबंधी मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया कि जिन परिसंपत्तियों का किराया लंबित है, उन्हें नोटिस जारी किया जाय। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उसके बाद भी राजस्व जमा नहीं करते हैं तो उनका टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को बकाया बिलों की वसूली में तेजी लाने तथा विगत एवं वर्तमान वर्ष की लंबित देनदारियों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत से दुकान किराया एवं स्वच्छता शुल्क की स्थिति की जानकारी ली गयी। जिलाधिकारी ने जिला विकास प्राधिकरण, लैंसडाउन उपजिलाधिकारी तथा जिला पंचायत को निर्देश दिए कि जो निर्माण कार्य नियमानुसार नहीं हो रहे हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाय। उन्होंने नियमित अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों की सूची तैयार करने को कहा। साथ ही लक्ष्मणझूला क्षेत्र में भी निर्माण मानकों की कड़ाई से जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक में संज्ञान में आया कि शासकीय अधिवक्ता सभी तहसीलों में नहीं पहुंच लाते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी तहसीलों में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताओं के लिए कार्य-दिवसवार एवं स्पष्ट रोस्टर तैयार किया जाय। उन्होंने कहा कि रोस्टर बनाते समय लंबित वादों की स्थिति, न्यायालयों की प्राथमिकता एवं कार्यभार का संतुलन अवश्य ध्यान में रखा जाए, ताकि किसी भी वाद में अनावश्यक देरी न हो। साथ ही रोस्टर का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने, नियमित समीक्षा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय रहते संशोधन करने के निर्देश भी दिए, जिससे न्यायालयीय कार्यवाही प्रभावी, जवाबदेह और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके।

जिलाधिकारी ने आबकारी अधिकारी को निर्देश दिए कि जिन मदिरा स्वामियों द्वारा राजस्व जमा नहीं किया है उनसे वसूली करें। साथ ही संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी के साथ मदिरा दुकानों और अवैध रूप से मदिरा बेच रहे पर कार्रवाई करें।

जिलाधिकारी ने पूर्ति विभाग की समीक्षा करते हुए गैस आपूर्ति की स्थिति की जानकारी ली। पूर्ति अधिकारी ने अवगत कराया कि व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति हेतु एसओपी बन चुकी है तथा उनका वितरण निर्धारित एसओपी के अनुसार किया जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि गैस एजेंसियों पर भीड़भाड़ से बचने हेतु सिलेंडरों का वितरण केवल निर्धारित स्थानों पर ही किया जाए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में घरेलू गैस वितरण की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले बुकिंग करायी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध करायी जाए तथा व्यावसायिक सिलेंडरों का वितरण भी एसओपी के अनुरूप पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रगति की समीक्षा में उप निर्वाचन अधिकारी ने जिले की उपलब्धि 93.97% बतायी। जिलाधिकारी ने यमकेश्वर तहसील द्वारा 100% लक्ष्य प्राप्त करने पर सराहना की तथा अन्य सभी तहसीलों को भी शीघ्र शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से गैर-चिन्हित मतदाताओं पर फोकस बढ़ाने को कहा और एसआईआर के सफल संपादन हेतु नियमित निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि एसआईआर प्रक्रिया प्रारंभ होने से पूर्व अपने स्तर पर समुचित समीक्षा कर लें तथा जिन कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जानी है, उनकी समयबद्ध तैनाती सुनिश्चित करें।

बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, उपजिलाधिकारी नूपुर वर्मा, चतर सिंह चौहान, संदीप कुमार, शालिनी मौर्य, श्रेष्ठ गुनसोला, कृष्णा त्रिपाठी, उप निर्वाचन अधिकारी शांति लाल शाह, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, आबकारी अधिकारी तपन पांडेय, पर्यटन अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, खनन अधिकारी अंकित मुयाल, आरटीओ द्वारिका प्रसाद, उपप्रभागीय वनाधिकारी आयशा बिष्ट, आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश काला सहित सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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