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देहरादून में राज्य स्तरीय परामर्श बैठक: मानव तस्करी पर गहन मंथन और रणनीति तय

देहरादून में राज्य स्तरीय परामर्श बैठक: मानव तस्करी पर गहन मंथन और रणनीति तय

देहरादून-  पुलिस लाइन कॉन्फ्रेंस हॉल में “मानव तस्करी एक संगठित अपराध” विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. गीता खन्ना, अध्यक्ष – उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी को एक आर्थिक अपराध करार दिया है, और यह समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों, पत्रकारों, बाल कल्याण संगठनों, और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

*मुख्य बिंदु:*

 साइबर अपराध और नई तस्करी प्रवृत्तियाँ:
डॉ. गीता खन्ना ने साइबर अपराध और इंटरनेट के माध्यम से हो रही तस्करी पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने कहा कि आज बच्चों के हाथ में डिवाइस है, जिससे इंटरनेट आधारित संप्रेषण बढ़ा है। इससे बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। अभिभावकों को डिजिटल हाइजीन, दो-स्तरीय सुरक्षा (two-step verification) अपनाने की आवश्यकता है।

भिक्षावृत्ति और अंग व्यापार:
श्री ओम प्रकाश ने मानव तस्करी को एक संगठित अपराध बताते हुए कहा कि भिक्षावृत्ति और अंग व्यापार जैसे अपराध इसमें शामिल हैं। देहरादून जैसे शहरों में भी इन गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।

न्यायिक परिप्रेक्ष्य:
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) श्रीमती सीमा डुंगराकोटी, सचिव – जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने कहा कि DLSA कानूनी सहायता और सहयोग प्रदान कर रहा है तथा सभी हितधारकों को एक साथ आकर इस समस्या से लड़ने की जरूरत है।

पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी:
अंजना गुप्ता, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखंड ने कहा कि traffickers हमारे आसपास ही होते हैं और वे कमजोर बच्चों को निशाना बनाते हैं। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर समुदाय तक पहुंचना होगा, जागरूकता फैलानी होगी और रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना होगा।

इतिहास और वर्तमान का प्रतिबिंब:
वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्षों बाद भी यदि मानव तस्करी समाज में मौजूद है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने गोरखा युद्ध (1819) के दौरान गढ़वाल क्षेत्र में मानवों की बिक्री के ऐतिहासिक उदाहरण दिए और बताया कि आज भी दूरस्थ क्षेत्रों में यह समस्या विद्यमान है।

मीडिया और डिजिटल पोर्टल्स की भूमिका:
“ब्लिंक” जैसे एरोटिक फिल्म व पोर्टल्स की निगरानी और रिपोर्टिंग की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

तकनीकी संसाधन और पुलिस सहयोग:
श्री आशीष गुसाईं (Nikmic Search CSEAM) ने साइबर अपराध पर उपयोगी सामग्री और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। पुलिस का “LEA पोर्टल” फेसबुक आदि पर क्वेरी भेजने का कार्य कर रहा है, जिससे जांच प्रक्रिया में मदद मिलती है।

झुग्गियों और असंगठित क्षेत्रों में निगरानी:
झुग्गी बस्तियों के पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित कर संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग के लिए प्रेरित किया गया।

निष्कर्ष:
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में सभी हितधारकों—पुलिस, न्यायालय, प्रशासन, सामाजिक संगठन, मीडिया और आम नागरिकों—को मिलकर काम करना होगा। जागरूकता, रिपोर्टिंग, और तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से ही इस गंभीर अपराध पर लगाम लगाई जा सकती है।

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