विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली की आठवीं विधानसभा का होगा चौथा सत्र, जो चार दिनों तक चलेगा
17 से 25 जनवरी तक भारत मंडपम में प्रस्तावित नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामकथा कार्यक्रम की दी जानकारी
Delhi Vidhansabha Winter Session: दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से 8 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। सत्र की शुरुआत उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण से होगी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि इस बार सदन की कार्यवाही पूरी तरह डिजिटल, समयबद्ध और अनुशासित ढंग से संचालित की जाएगी। सत्र को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। विधायकों और संबंधित अधिकारियों को समन भेज दिए गए हैं।
शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष ने बताया कि यह दिल्ली की आठवीं विधानसभा का चौथा सत्र होगा, जो चार दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार कार्यवाही में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए प्रस्ताव और दस्तावेज डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे। सत्र के दौरान कई अहम दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है, जिनके लिए जरूरी व्यवस्थाएं पहले ही कर ली गई हैं।
इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ने 17 से 25 जनवरी तक भारत मंडपम में प्रस्तावित नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामकथा कार्यक्रम की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू प्रवचन देंगे। कार्यक्रम का आयोजन विश्व शांति मिशन के तहत किया जा रहा है, जिसकी आयोजन समिति के अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद होंगे। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष इस कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक रहेंगे। रामकथा में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
राजनीतिक दृष्टि से शीतकालीन सत्र के दौरान माहौल गरमाने के आसार हैं। सत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की जा सकती है, जिसमें शीश महल, मुहल्ला क्लीनिक, लाडली योजना और पिछली सरकार के दौरान प्रचार पर हुए खर्च से जुड़े मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इन विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
इसके अलावा, विधानसभा की विशेष समिति से जुड़े पुराने मामलों और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं की गैरहाजिरी का मुद्दा भी फिर से उठ सकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सभी सदस्यों को बोलने के लिए तय समय मिलेगा और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि राजनीतिक टकराव की आशंका के बीच यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि सत्र के दौरान दिल्ली से जुड़े अहम जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाने का अवसर मिलेगा।
