Bihar Vidhansabha Election: बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण कल यानी 11 नवंबर को होगा। इस चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। चुनाव प्रचार अब खत्म हो चुका है और उम्मीदवार घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। दूसरे चरण में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 122 और महागठबंधन के 126 प्रत्याशी मैदान में हैं। एनडीए की ओर से भाजपा के 53, जदयू के 44, लोजपा (रामविलास) के 15, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 और हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) के 6 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं महागठबंधन की ओर से राजद के 70, कांग्रेस के 37, वीआईपी के 8, सीपीआई के 4, सीपीआई(एमएल) के 6 और सीपीआई के 1 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा जनसुराज पार्टी के 120 उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस चरण में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर है। इनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, मंत्री विजेंद्र यादव, नीतीश मिश्रा, प्रेम कुमार, कृष्णनंदन पासवान, प्रमोद कुमार, शीला मंडल, लेशी सिंह और जयंत राज जैसे कई नाम शामिल हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, राजद के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता और भाकपा माले के नेता महबूब आलम की प्रतिष्ठा भी इस चरण के मतदान से जुड़ी है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने दूसरे चरण से पहले कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद एनडीए खेमे में निराशा का माहौल है और इस बार बिहार में बदलाव तय है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे किसी दबाव में न आकर निष्पक्ष तरीके से काम करें। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग हर तरह से बिहार पर कब्जा करना चाहते हैं, लेकिन बिहार की जनता अब जाग चुकी है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
वहीं एनडीए नेताओं ने पलटवार करते हुए दावा किया कि बिहार की जनता पूरी तरह से उनके साथ है। भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि 11 नवंबर को भारी संख्या में मतदान कर जनता विकास, रोजगार और स्थिरता के लिए एनडीए की सरकार दोबारा बनाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में कई बड़े काम हुए हैं। सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं — जनता तय करेगी कि बिहार का असली राजा कौन होगा।
अब सबकी नजरें 11 नवंबर पर टिकी हैं। बिहार के मतदाता तय करेंगे कि इस बार राज्य में सत्ता का चेहरा बदलेगा या एनडीए की नाव फिर से किनारे लगेगी।
