नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने विधायकों और सांसदों से जुड़े 45 आपराधिक मामलों को वापस लेने पर रोक लगा दी थी। इन मामलों में कोरोना काल के दौरान रैलियां और प्रदर्शन करने को लेकर दर्ज किए गए केस भी शामिल हैं, जो पिछली भाजपा सरकार के समय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज हुए थे।
मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 16 मार्च तय की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने दलील दी कि सभी मामलों को जनहित में वापस लेने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय सार्वजनिक अभियोजकों, जिला वकीलों, जिलाधीशों और पुलिस अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद किया गया है।
वहीं, हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 269 (संक्रमण फैलने का खतरा), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम से जुड़े मामलों को वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट का कहना था कि भले ही पहले CrPC की धारा 321 के तहत मामलों को वापस लेने के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी नहीं थी, लेकिन वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विधायकों और सांसदों से जुड़े मामलों में अदालत की मंजूरी अनिवार्य हो गई है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऐसे मामलों को राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि वास्तविक जनहित और ईमानदार मंशा से ही वापस लिया जाना चाहिए।
