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अल्पसंख्यक आरक्षण के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट

अल्पसंख्यक आरक्षण के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के दिनों में सामने आए उन मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है, जिनमें आरक्षण का लाभ लेने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन किए जाने का दावा किया जा रहा है। अदालत ने इस प्रवृत्ति को गंभीर बताते हुए हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जानना आवश्यक है कि राज्य में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया क्या है और किन मानकों के आधार पर प्रशासनिक अधिकारी ऐसे दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं। अदालत ने संकेत दिया कि बिना ठोस जांच के प्रमाणपत्र जारी होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें दो अभ्यर्थियों ने नीट पीजी पाठ्यक्रम में बौद्ध अल्पसंख्यक श्रेणी के अंतर्गत प्रवेश की मांग की थी। अदालत ने तथ्यों पर विचार करने के बाद याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि केवल दावा भर के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

सुनवाई के दौरान पीठ ने आवेदकों की सामाजिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर भी गौर किया। अदालत ने यह भी नोट किया कि परीक्षा आवेदन के समय दोनों अभ्यर्थियों ने स्वयं को सामान्य वर्ग का बताया था, जिससे उनके दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करे कि अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़े नियम क्या हैं और स्थानीय स्तर पर इनका पालन किस तरह किया जा रहा है।

अदालत ने यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन यदि इसका उपयोग आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किया जाए, तो इससे वास्तविक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मामलों पर सख्ती जरूरी है।

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