चमोली: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित भारत-चीन (तिब्बत) सीमा के पास बर्फ से ढकी देवताल झील इन दिनों पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो रही है। इस साल यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। प्रशासन द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू किए जाने और समय पर हुई बर्फबारी के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक झील की खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं। अब तक करीब 2300 पर्यटक देवताल पहुंच चुके हैं और यहां की बर्फीली वादियों में प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा रहे हैं।
18 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे देवताल का रोमांचक सफर
देवताल झील समुद्र तल से करीब 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस अद्भुत झील तक पहुंचने के लिए माणा गांव से लगभग 53 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा करनी पड़ती है। ऊंचाई और मौसम की चुनौती के बावजूद देवताल की यात्रा रोमांच और शांति दोनों का अनुभव कराती है। यह क्षेत्र भारत-चीन (तिब्बत) सीमा के बेहद करीब होने के कारण पर्यटकों को यहां जाने से पहले प्रशासन से अनुमति लेनी होती है।
ऑनलाइन सुविधा से बढ़ी सुविधा, घटा झंझट
पहले देवताल जाने के लिए अनुमति ऑफलाइन प्रक्रिया से ली जाती थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। इससे न सिर्फ आवेदन प्रक्रिया आसान हुई है बल्कि पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
बर्फ की सफेद चादर बनी नजारे की जान
अक्तूबर महीने में ही इस क्षेत्र में मौसम की पहली बर्फबारी हो चुकी थी। इसके बाद से झील के चारों ओर बर्फ की सफेद चादर ने इसकी सुंदरता को और निखार दिया है। इसी वजह से देशभर से सैलानी यहां खिंचे चले आ रहे हैं।
पिछले वर्ष जहां करीब 2200 पर्यटक देवताल पहुंचे थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा पहले ही पार हो चुका है।
कपाट बंद होने से सीमित समय तक आवाजाही
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद यहां की आवाजाही भी सीमित हो जाती है। फिलहाल पर्यटक अब भी देवताल की ओर रुख कर रहे हैं और झील के साथ-साथ बर्फ से ढकी चोटियों का आनंद उठा रहे हैं।
