नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में एलयूसीसी चिटफंड घोटाले की जांच को लेकर सुनवाई एक बार फिर चर्चा में है। अदालत की खंडपीठ, जिसमें न्यायाधीश रविन्द्र मैठाणी और सिद्धार्थ साह शामिल हैं, ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब तक की जांच से जुड़ी सभी रिपोर्टें इसी दिन तक प्रस्तुत की जाएं।
मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) से जुड़े करीब 800 करोड़ रुपये के कथित चिटफंड घोटाले का है, जिसमें हजारों निवेशकों के साथ ठगी का आरोप है। पूर्व में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि कंपनी के संचालकों ने एजेंटों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित कर बड़ी रकम जुटाई और बाद में फरार हो गए।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और कई मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ निवेशकों ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका केस तक दर्ज नहीं किया, जिससे उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है।
अदालत ने पीड़ितों को सुझाव दिया कि वे अपनी शिकायतें सीधे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपें और निवेश से जुड़े सभी दस्तावेज भी साथ लगाएं। इस घोटाले को लेकर देहरादून, ऋषिकेश समेत कई इलाकों के लोगों ने जनहित याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि 28 नवंबर 2025 को सीबीआई ने इस मामले में 46 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। राज्य के कई जिलों में इस सोसायटी के खिलाफ पहले से ही दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं। बताया जाता है कि कंपनी ने उत्तराखंड में 35 शाखाएं खोलकर लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया और निवेश करवाया, लेकिन मैच्योरिटी के बाद भी कई निवेशकों को उनका पैसा वापस नहीं मिला।
