नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वीएफएक्स का कमाल है कि 74 साल के रजनीकांत को बड़े पर्दे पर 30 साल का जवान बना देता है। थिएटर में जब उनके 50 साल पुराने कूल अंदाज के साथ एंट्री होती है, तो फैंस सीटियां बजाकर खुशी से झूम उठते हैं। आजकल फिल्मों का नया ट्रेंड है — अलग-अलग रीजनल सुपरस्टार्स को एक ही फिल्म में लाना, और ‘कुली’ भी इसी फार्मूले पर बनी है।
फिल्म का निर्देशन लोकेश कनगराज ने किया है, जिन्होंने ‘कैथी’, ‘मास्टर’, ‘विक्रम’ और ‘लियो’ जैसी हिट फिल्में दी हैं। लेकिन इस बार कहानी के मामले में वह कमजोर पड़ गए हैं। ‘कुली’ उनकी सबसे कन्फ्यूजिंग और कमजोर स्क्रिप्ट वाली फिल्म मानी जा सकती है। हालांकि, रजनीकांत के सिनेमा के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चलने की पूरी संभावना रखती है, क्योंकि इसमें स्वैग, एक्शन और स्टार पावर की कमी नहीं है।

एक्टिंग
फिल्म पूरी तरह रजनीकांत के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने एक्शन के साथ कॉमेडी में भी कमाल किया है। नागार्जुन का अभिनय अच्छा है, लेकिन उनकी हिंदी डायलॉग डिलीवरी थोड़ी कमजोर है। सौबिन शाहिर ने शानदार अभिनय कर दर्शकों को डराने में सफलता पाई है। सत्यराज का काम ठीक-ठाक है, जबकि श्रुति हासन को केवल दौड़ते हुए दिखाया गया है, उन्हें अभिनय का ज्यादा मौका नहीं मिला। उपेंद्र के पास कम स्क्रीन टाइम है और उनका एक्सप्रेशन ज्यादातर एक जैसा है। आमिर का कैमियो मजेदार है और रचिता राम अपने अभिनय से चौंकाती हैं।
निर्देशन
लोकेश कनगराज की पहचान दमदार एक्शन सीन हैं, और इस फिल्म में भी वे गजब के हैं। कुछ डायलॉग एंटरटेनिंग हैं, जैसे— “मेरी पहुंच काफी ऊपर तक है… शाहरुख और ऐश्वर्या को भी जानता हूं” और रजनीकांत के ट्रेडमार्क डायलॉग “हाथ लगा के देख” और “कर दूंगा मुन्ना” दर्शकों को खूब पसंद आते हैं। हालांकि, कहानी को खींचा गया है और कई बड़े कलाकारों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता था।

संगीत
अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के एक्शन सीन्स में जान डाल देता है। हालांकि, पूजा हेगड़े का आइटम नंबर ‘मोनिका.. मोनिका’ फिल्म की गति को धीमा करता है, लेकिन सौबिन शाहिर के डांस ने गाने को मजेदार बना दिया।
देखें या नहीं
अगर आप रजनीकांत के फैन हैं या साउथ इंडियन मसाला फिल्मों का मजा लेते हैं, तो ‘कुली’ को जरूर देख सकते हैं। यह फिल्म 15 अगस्त की छुट्टी पर परिवार और दोस्तों के साथ थिएटर में देखने के लिए बढ़िया एंटरटेनमेंट पैकेज है। कहानी भले ही कमजोर हो, लेकिन रजनीकांत का स्वैग और एक्शन आपको निराश नहीं करेगा।
