दिल्ली- दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एनसीआर के सभी संबंधित राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि ग्रेप-3 प्रतिबंधों के कारण निर्माण गतिविधियों पर रोक से जिन मजदूरों, कारीगरों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें निर्वाह भत्ता उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्यों से अगली सुनवाई पर यह भी रिपोर्ट देने को कहा कि मजदूरों को कितना और किस प्रकार का आर्थिक सहयोग दिया गया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम सराहनीय हैं, लेकिन नीतिगत फैसलों में उन वर्गों का ध्यान रखना भी जरूरी है जिनकी रोजी-रोटी सीधे प्रभावित होती है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 11 नवंबर को प्रदूषण स्तर ‘गंभीर’ होने पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-3) लागू कर दिया था। इसके तहत निर्माण स्थल, भारी वाहनों की आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए।
प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए सीएक्यूएम ने एनसीआर के सभी राज्यों को स्कूलों में होने वाली आउटडोर खेल प्रतियोगिताओं को स्थगित करने की भी सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुबह की सुनवाई में आयोग को निर्देश दिया था कि वह नवंबर और दिसंबर में होने वाले ओपन एयर स्पोर्ट्स इवेंट को रोकने पर विचार सुनिश्चित करे।
न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने अदालत को अवगत कराया कि प्रदूषण का सबसे अधिक नुकसान बच्चों को होता है, ऐसे में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति में उन्हें बाहरी गतिविधियों के लिए बाध्य करना “मानो गैस चैंबर में भेजने जैसा” है। अदालत ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन को सक्रिय और सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
