ताइपे। चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों के बीच ताइवान ने अपनी सुरक्षा क्षमताओं को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने एक अंतरराष्ट्रीय अखबार में लिखे लेख में स्पष्ट किया है कि सरकार 40 अरब डॉलर का अतिरिक्त रक्षा पैकेज तैयार कर रही है, जिसके तहत अमेरिका से आधुनिक हथियार प्रणालियों की खरीद भी शामिल होगी। उनका कहना है कि यह निवेश ताइवान की स्व-रक्षा क्षमता को नई दिशा देगा।
बीजिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानते हुए पिछले कई वर्षों से दबाव बढ़ाता आया है, वहीं ताइवान ने दो टूक कहा है कि वह चीन के किसी भी दावे को स्वीकार नहीं करता। राष्ट्रपति लाई ने कहा कि नए सुरक्षा ढांचे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई पर चीन को अधिक जोखिम और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़े।
राष्ट्रपति पहले भी अतिरिक्त रक्षा व्यय की घोषणा कर चुके थे, लेकिन विस्तृत जानकारी अब सामने आई है। उनके कार्यालय के अनुसार, बुधवार को वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के बाद रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें रणनीति से जुड़े और बिंदु साझा किए जाएंगे।
सरकार 2026 तक रक्षा बजट को लगभग 950 अरब ताइवान डॉलर (लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर) तक बढ़ाने का प्रस्ताव रख रही है। यह राशि देश की जीडीपी का 3.32 प्रतिशत है—जो 2009 के बाद पहली बार 3 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने जा रहा है।
ताइवान और अमेरिका के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं होने के बावजूद, अमेरिकी कानून वाशिंगटन को ताइवान की आत्मरक्षा के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य करता है। हालांकि हाल के वर्षों में अमेरिकी हथियार बिक्री बहुत सीमित रही है और ताइवान को केवल एक बड़े पैकेज की मंजूरी मिली है, जिसमें लड़ाकू विमानों के लिए पुर्जे शामिल हैं।
राष्ट्रपति लाई ने यह भी कहा कि ताइवान संवाद के रास्ते खुले रखने के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि लोकतंत्र और स्वतंत्रता जैसे मूल सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत तभी संभव है जब दोनों पक्ष सम्मानजनक और समान स्तर पर आगे बढ़ें।
