पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता सहित देश के 15 बड़े एयरपोर्ट्स तकनीक के दायरे में शामिल
नए एंटी-ड्रोन सिस्टम में रडार, रेडियो-फ्रीक्वेंसी जैमर्स, लेजर आधारित इंटरसेप्शन और जीपीएस स्पूफिंग जैसे उच्च स्तरीय सेंसर और टूल्स होंगे शामिल
Airport security India: देश के प्रमुख हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था अब एक नए और अत्याधुनिक स्तर पर पहुंचने वाली है। केंद्र सरकार जल्द ही सभी बड़े कमर्शियल एयरपोर्ट्स को हाई-टेक एंटी-ड्रोन सुरक्षा कवच से लैस करने की तैयारी में है। बढ़ते ड्रोन खतरों और हालिया वैश्विक घटनाओं को देखते हुए सरकार ने इस परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद अनाधिकृत ड्रोन गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने और संभावित आतंकी जोखिमों को टालने में बड़ी मदद मिलेगी।
पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता सहित देश के लगभग 15 बड़े एयरपोर्ट्स को इस उन्नत तकनीक के दायरे में लाया जाएगा। गृह मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त निर्देशों के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसकी तैनाती की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। अभी तक यह प्रणाली मुख्य रूप से संवेदनशील सैन्य ठिकानों और रक्षा क्षेत्रों में ही उपयोग की जाती थी, लेकिन बदलते सुरक्षा परिदृश्यों ने इसे सिविल एविएशन सेक्टर में भी अनिवार्य बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती इंस्टॉलेशन सूची में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट और हैदराबाद के राजीव गांधी एयरपोर्ट शामिल होंगे। इसके बाद अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी जैसे अन्य एयरपोर्ट्स को भी धीरे-धीरे इस सुरक्षा नेटवर्क में जोड़ा जाएगा। सरकार के इस कदम के पीछे मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ड्रोन तकनीक की निर्णायक भूमिका और वैश्विक परिदृश्य में बढ़ते ड्रोन खतरे प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि नए एंटी-ड्रोन सिस्टम में रडार, रेडियो-फ्रीक्वेंसी जैमर्स, लेजर आधारित इंटरसेप्शन और जीपीएस स्पूफिंग जैसे उच्च स्तरीय सेंसर और टूल्स शामिल होंगे। यह सिस्टम 5–7 किलोमीटर की दूरी में मौजूद किसी भी संदिग्ध ड्रोन को पहचानने, उसका नियंत्रण अपने अधीन करने या आवश्यकता होने पर उसे नष्ट करने की क्षमता रखता है। इस तकनीक को भारतीय कंपनी बीईएल द्वारा इजरायल और यूरोपीय कंपनियों के सहयोग से तैयार किया जा रहा है।
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने यह कदम भले देर से उठाया हो, लेकिन यह एयर ट्रैफिक सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक सुधार है। अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों ने वर्षों पहले अपने बड़े एयरपोर्ट्स पर ऐसी तकनीक लगा दी थी। लंदन गैटविक एयरपोर्ट पर ड्रोन की वजह से 36 घंटे तक उड़ानें ठप रहने की घटना ने दुनिया को यह खतरा स्पष्ट रूप से दिखाया था। भारत में भी छोटे ड्रोन की अवैध उपलब्धता सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण है। ऐसे में एंटी-ड्रोन सिस्टम अब भारतीय एयरपोर्ट्स की सुरक्षा का आवश्यक हिस्सा बनने जा रहा है।
