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पुतिन का बड़ा बयान: “मोदी किसी दबाव में काम नहीं करते, भारत अब वैश्विक शक्ति”

पुतिन का बड़ा बयान: “मोदी किसी दबाव में काम नहीं करते, भारत अब वैश्विक शक्ति”

नई दिल्ली- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को स्थित क्रेमलिन में भारत के एक न्यूज चैनल को दिए विशेष इंटरव्यू में भारत-रूस संबंधों, वैश्विक राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों पर विस्तार से चर्चा की। दो दिवसीय व्यस्त भारत-फोकस कार्यक्रमों के बीच उन्होंने यह बातचीत की, जिसमें विश्व परिदृश्य से लेकर द्विपक्षीय सहयोग तक कई अहम मुद्दे शामिल रहे।

1. “भारत किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेता”

पुतिन ने कहा कि आज का भारत पहले से अधिक सशक्त और निर्णायक है और उस पर कोई देश दबाव नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्र सोच रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत अपने हितों के अनुरूप निर्णय लेता है। पुतिन के मुताबिक, आज की दुनिया में भारत की स्थिति पहले से कहीं मजबूत है और मोदी नेतृत्व में यह बदलाव और भी स्पष्ट हुआ है।

2. भारतीय संस्कृति को लेकर रूसी जनता में गहरी प्रशंसा

भारतीय संस्कृति का ज़िक्र करते हुए पुतिन ने कहा कि रूस में भारतीय परंपराओं, फिल्मों और संगीत के प्रति दशकों से गहरी रुचि रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता को रूस में अक्सर “सपनों जैसी सुंदर संस्कृति” के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच सदियों से बने भावनात्मक रिश्ते का हिस्सा बताया।

3. “भारत के पास एक भरोसेमंद नेता है”

प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि उनके बीच बेहद भरोसेमंद और मैत्रीपूर्ण रिश्ते हैं। पुतिन का कहना था कि Modi भारत के हितों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए गंभीरता से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में होना देश के लिए सौभाग्य की बात है।

4. रुपये–रूबल व्यापार पर स्पष्टीकरण

व्यापार संतुलन के सवाल पर पुतिन ने कहा कि रुपये और रूबल के लेन-देन को रोकने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि उद्देश्य व्यापार में मौजूद असंतुलन को दुरुस्त करना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ऐसा समाधान ढूंढना होगा जिससे दोनों तरफ के कारोबार को बराबरी का लाभ मिल सके। उन्होंने संकेत दिया कि भारत से आयात बढ़ाने पर रूस विचार कर रहा है।

5. आतंकवाद पर भारत का समर्थन

भारत में आतंकवाद के मुद्दे पर पुतिन ने साफ कहा कि हिंसा को किसी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि रूस भी आतंकवाद का पीड़ित रहा है इसलिए दोनों देशों के बीच इस मोर्चे पर सहयोग बहुत मजबूत है। उनके मुताबिक आज़ादी के लिए संघर्ष हमेशा संवैधानिक तरीकों से ही होना चाहिए।

6. भारत-चीन विवाद पर रूस का निष्पक्ष रुख

भारत और चीन के बीच विवादों पर रूस की भूमिका के सवाल पर पुतिन ने कहा कि दोनों देश रूस के करीबी मित्र हैं और आपसी मुद्दों का समाधान उन्हें स्वयं ही निकालना चाहिए। पुतिन ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग किसी न किसी समाधान पर जरूर पहुंचेंगे।

7. रक्षा तकनीक में विश्वास का प्रतीक भारत-रूस साझेदारी

पुतिन ने दोहराया कि रूस भारत को केवल सैन्य उपकरण नहीं बेचता बल्कि तकनीक भी साझा करता है, जो गहरे विश्वास का संकेत है। उन्होंने बताया कि जहाजों, मिसाइलों से लेकर विमान निर्माण तक कई तकनीकों पर दोनों देश एकसाथ काम कर रहे हैं। ब्रह्मोस मिसाइल और टी-90 टैंक को उन्होंने सफल सहयोग का उदाहरण बताया।

8. भारत की विकास दर की सराहना

भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि 150 करोड़ की आबादी वाले देश का 7.7% की विकास दर दर्ज करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत की तेज़ विकासगति पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है।

9. स्पेस, न्यूक्लियर और हाई-टेक क्षेत्रों में नई संभावनाएँ

पुतिन के अनुसार भारत-रूस सहयोग अब पारंपरिक रक्षा संबंधों से आगे बढ़कर अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, एआई, जहाज निर्माण और उन्नत तकनीकों तक विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की टेक्नोलॉजीज़ पर मिलकर काम करना दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगा।

10. पीएम मोदी के साथ कार यात्रा का किस्सा

इंटरव्यू में पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान हुई अपनी अनौपचारिक कार-यात्रा का ज़िक्र भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अक्सर अनौपचारिक अंदाज़ में भी बातचीत करते हैं और यही उनकी दोस्ती और सहजता का संकेत है। उनके मुताबिक चर्चा का सिलसिला इतना लंबा चल गया कि उन्हें बाद में एहसास हुआ कि लोग उनका इंतजार कर रहे होंगे।

नई दिल्ली- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को स्थित क्रेमलिन में भारत के एक न्यूज चैनल को दिए विशेष इंटरव्यू में भारत-रूस संबंधों, वैश्विक राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों पर विस्तार से चर्चा की। दो दिवसीय व्यस्त भारत-फोकस कार्यक्रमों के बीच उन्होंने यह बातचीत की, जिसमें विश्व परिदृश्य से लेकर द्विपक्षीय सहयोग तक कई अहम मुद्दे शामिल रहे।

1. “भारत किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेता”

पुतिन ने कहा कि आज का भारत पहले से अधिक सशक्त और निर्णायक है और उस पर कोई देश दबाव नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्र सोच रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत अपने हितों के अनुरूप निर्णय लेता है। पुतिन के मुताबिक, आज की दुनिया में भारत की स्थिति पहले से कहीं मजबूत है और मोदी नेतृत्व में यह बदलाव और भी स्पष्ट हुआ है।

2. भारतीय संस्कृति को लेकर रूसी जनता में गहरी प्रशंसा

भारतीय संस्कृति का ज़िक्र करते हुए पुतिन ने कहा कि रूस में भारतीय परंपराओं, फिल्मों और संगीत के प्रति दशकों से गहरी रुचि रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता को रूस में अक्सर “सपनों जैसी सुंदर संस्कृति” के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच सदियों से बने भावनात्मक रिश्ते का हिस्सा बताया।

3. “भारत के पास एक भरोसेमंद नेता है”

प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि उनके बीच बेहद भरोसेमंद और मैत्रीपूर्ण रिश्ते हैं। पुतिन का कहना था कि Modi भारत के हितों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए गंभीरता से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में होना देश के लिए सौभाग्य की बात है।

4. रुपये–रूबल व्यापार पर स्पष्टीकरण

व्यापार संतुलन के सवाल पर पुतिन ने कहा कि रुपये और रूबल के लेन-देन को रोकने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि उद्देश्य व्यापार में मौजूद असंतुलन को दुरुस्त करना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ऐसा समाधान ढूंढना होगा जिससे दोनों तरफ के कारोबार को बराबरी का लाभ मिल सके। उन्होंने संकेत दिया कि भारत से आयात बढ़ाने पर रूस विचार कर रहा है।

5. आतंकवाद पर भारत का समर्थन

भारत में आतंकवाद के मुद्दे पर पुतिन ने साफ कहा कि हिंसा को किसी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि रूस भी आतंकवाद का पीड़ित रहा है इसलिए दोनों देशों के बीच इस मोर्चे पर सहयोग बहुत मजबूत है। उनके मुताबिक आज़ादी के लिए संघर्ष हमेशा संवैधानिक तरीकों से ही होना चाहिए।

6. भारत-चीन विवाद पर रूस का निष्पक्ष रुख

भारत और चीन के बीच विवादों पर रूस की भूमिका के सवाल पर पुतिन ने कहा कि दोनों देश रूस के करीबी मित्र हैं और आपसी मुद्दों का समाधान उन्हें स्वयं ही निकालना चाहिए। पुतिन ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग किसी न किसी समाधान पर जरूर पहुंचेंगे।

7. रक्षा तकनीक में विश्वास का प्रतीक भारत-रूस साझेदारी

पुतिन ने दोहराया कि रूस भारत को केवल सैन्य उपकरण नहीं बेचता बल्कि तकनीक भी साझा करता है, जो गहरे विश्वास का संकेत है। उन्होंने बताया कि जहाजों, मिसाइलों से लेकर विमान निर्माण तक कई तकनीकों पर दोनों देश एकसाथ काम कर रहे हैं। ब्रह्मोस मिसाइल और टी-90 टैंक को उन्होंने सफल सहयोग का उदाहरण बताया।

8. भारत की विकास दर की सराहना

भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि 150 करोड़ की आबादी वाले देश का 7.7% की विकास दर दर्ज करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत की तेज़ विकासगति पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है।

9. स्पेस, न्यूक्लियर और हाई-टेक क्षेत्रों में नई संभावनाएँ

पुतिन के अनुसार भारत-रूस सहयोग अब पारंपरिक रक्षा संबंधों से आगे बढ़कर अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, एआई, जहाज निर्माण और उन्नत तकनीकों तक विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की टेक्नोलॉजीज़ पर मिलकर काम करना दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगा।

10. पीएम मोदी के साथ कार यात्रा का किस्सा

इंटरव्यू में पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान हुई अपनी अनौपचारिक कार-यात्रा का ज़िक्र भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अक्सर अनौपचारिक अंदाज़ में भी बातचीत करते हैं और यही उनकी दोस्ती और सहजता का संकेत है। उनके मुताबिक चर्चा का सिलसिला इतना लंबा चल गया कि उन्हें बाद में एहसास हुआ कि लोग उनका इंतजार कर रहे होंगे।

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