दिल्ली एनसीआर(ग्रेटर नोएडा): गौतमबुद्धनगर के राज्य कर विभाग ने जीएसटी सिस्टम का दुरुपयोग करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विभाग की जांच में सामने आया कि दो कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत बिलिंग का सहारा लेकर सरकार को कुल 180 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान पहुंचाया। इन फर्मों द्वारा प्राप्त बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को अन्य व्यापारिक इकाइयों तक भी पहुंचाया गया, जिससे कर चोरी का दायरा और बढ़ गया। विभाग की शिकायत के आधार पर कासना कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहला मामला: मल्टीकॉम इंटरनेशनल
मल्टीकॉम इंटरनेशनल का पंजीकरण नोएडा सेक्टर-71 निवासी प्रमोद विजय खुल्लर के नाम पर हुआ था। जांच में पता चला कि फर्म ने न केवल फर्जी सप्लाई दिखाई, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारी मात्रा में आईटीसी भी ले लिया। विभाग के मुताबिक, इस फर्म द्वारा 78.44 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई और इतनी ही राशि का दंड लगाया गया। इस तरह कुल नुकसान 156.88 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। विभागीय टीम जब फर्म के घोषित पते—बी-15, इकोटेक एक्सटेंशन, कासना—पर पहुंची तो वहां यह कंपनी मौजूद ही नहीं थी, बल्कि दूसरी यूनिट काम करती मिली। इससे स्पष्ट हुआ कि फर्म का वास्तविक अस्तित्व संदिग्ध है।
दूसरा मामला: सिद्धि विनायक एक्सपोर्ट्स
दूसरी फर्म सिद्धि विनायक एक्सपोर्ट्स, जिसका पंजीकरण दिल्ली निवासी विकास मिश्रा के नाम पर है, उसी पते से संचालित दिखाया गया था। जांच में पाया गया कि मिश्रा ने भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सप्लाई दिखाकर गलत आईटीसी हासिल किया और आगे कई फर्मों को अवैध लाभ पहुंचाया। इस फर्जीवाड़े से सरकार को 24.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जब विभाग की टीम घोषित पते पर जांच के लिए पहुंची तो यहां भी फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। इसके चलते विकास मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
एक ही पते का इस्तेमाल, बड़ा रैकेट होने की आशंका
दोनों फर्मों ने एक ही व्यापार स्थल को पंजीकरण के दौरान दर्शाया था, जबकि मौके पर एक अलग कंपनी चलती हुई मिली। दोनों संचालक फिलहाल संपर्क में नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि ये मामले संभवतः एक बड़े फर्जी इनवॉइसिंग रैकेट से जुड़े हो सकते हैं, जिसके तार कई राज्यों तक फैल सकते हैं। सहायक आयुक्त कर, प्रशांत की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ला के अनुसार मामले की जांच जारी है।
