दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में सोशल मीडिया के जरिए बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक और यौन शोषण वाली सामग्री के प्रसार के मामले सामने आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग इस तरह की सामग्री को लाइक और शेयर कर इसे आगे बढ़ा रहे हैं। इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन ने इस साल 1 जनवरी से 15 दिसंबर के बीच अलग-अलग थानों में 60 एफआईआर दर्ज कराई हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में सात ऐसे आरोपी भी सामने आए हैं जो पहले भी इसी तरह के अपराध में शामिल रहे हैं। सभी मामलों की जांच जारी है। बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों की निगरानी के लिए एसपीयूडब्ल्यूएसी की सीएसईएएम सेल को दिल्ली की नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो भारतीय साइबर अपराध केंद्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है।
ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़े मामलों में पीड़ितों की पहचान एक बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नए डिजिटल टूल्स की मदद से पीड़ितों की पहचान और आरोपियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल करना आसान होगा, जिससे सजा की दर भी बढ़ेगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को ऑनलाइन बहकाने और यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। साल 2024 में ऑनलाइन बहकावे के मामलों में करीब 192 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री का निर्माण, प्रसार और संग्रह जैसे अपराध शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में ऑनलाइन अश्लील सामग्री देखने की बढ़ती प्रवृत्ति भी चिंता का विषय है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों को निशाना बनाने के प्रयास बढ़ रहे हैं, जिससे ऑनलाइन शोषण के खतरे और गंभीर हो गए हैं।
दिल्ली पुलिस ने तकनीकी कंपनियों से सख्त सुरक्षा व्यवस्था अपनाने की अपील की है। साथ ही माता-पिता और आम लोगों से कहा गया है कि वे बच्चों को ऑनलाइन खतरों के प्रति जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
