मुंबई। महाराष्ट्र में निकाय चुनावों से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। एक ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अपने गठबंधन की औपचारिक घोषणा की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़े—शरद पवार गुट और अजीत पवार गुट—पुणे महानगरपालिका चुनाव एक साथ लड़ने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जुलाई 2023 में पार्टी विभाजन के बाद यह दोनों गुटों का पहला साझा चुनावी प्रयास होगा।
इस घटनाक्रम ने राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चाओं को तेज कर दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी भविष्य में एनडीए के करीब जा सकती है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी अलग रणनीति अपनाई है, जबकि कांग्रेस भी फिलहाल कमजोर स्थिति में नजर आ रही है।
एनसीपी-एससीपी नेता अंकुश काकड़े ने संकेत देते हुए कहा कि पुणे नगर निगम चुनाव दोनों गुट मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि इस फैसले को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है, हालांकि सीट बंटवारे पर अभी कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है। काकड़े ने यह भी कहा कि कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) से बातचीत जारी रहेगी और सभी दल मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
इस संभावित गठबंधन को एमवीए के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अजीत पवार गुट पहले से ही भाजपा और शिंदे गुट के साथ सत्ता में शामिल है। पुणे में दोनों एनसीपी गुटों की एकजुटता स्थानीय स्तर पर विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर सकती है।
हालांकि, इस फैसले से एनसीपी-एससीपी के भीतर असहमति की खबरें भी सामने आ रही हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि महायुति के साथ नजदीकी से एमवीए की वैचारिक पहचान को नुकसान हो सकता है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अजीत पवार गुट से हाथ मिलाना भाजपा से समझौता करने जैसा है।
उधर, राज्य चुनाव आयोग के अनुसार महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नामांकन की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है, जबकि मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा और नतीजे अगले दिन घोषित किए जाएंगे।
