अदालत ने लगाया लाखों का जुर्माना, 80% राशि पीड़िता को देने का आदेश
नोएडा। युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में जिला न्यायालय की विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो प्रॉपर्टी डीलरों राजीव गुप्ता और प्रदीप मित्तल को दोषी ठहराते हुए दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही राजीव गुप्ता पर 2.95 लाख रुपये और प्रदीप मित्तल पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता को दी जाएगी।
नौकरी के बहाने शुरू हुआ शोषण
अदालत में दिए बयान के अनुसार, अप्रैल 2017 में पीड़िता रोजगार की तलाश में नोएडा के सेक्टर-64 स्थित एक कॉमर्शियल बिल्डिंग पहुंची थी। यहां उसकी मुलाकात प्रॉपर्टी डीलर राजीव गुप्ता से हुई, जिसने कंप्यूटर ऑपरेटर की जरूरत बताकर उसका बायोडाटा ले लिया। कुछ दिन बाद राजीव ने उसे 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी का प्रस्ताव दिया, जिसके बाद पीड़िता ने कार्यालय आना शुरू किया।
करीब 15 दिन काम करने के बाद जब पीड़िता ने नौकरी छोड़ने और वेतन मांगने की बात कही, तो आरोप है कि इसी दौरान उसे बहाने से ऑफिस बुलाया गया। वहां खाने-पीने के बाद वह अचेत हो गई। होश आने पर उसने खुद को निर्वस्त्र हालत में पाया, जबकि आरोपी शराब पी रहे थे। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।
धमकी देकर बार-बार बनाया शिकार
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक उसका शोषण किया। वर्ष 2017 से 2020 के बीच कई बार दुष्कर्म किया गया और अन्य लोगों को भी इसमें शामिल किया गया। लॉकडाउन के दौरान भी आरोपी वीडियो कॉल के जरिए उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे।
शादी के बाद शुरू हुई न्याय की लड़ाई
वर्ष 2020 में शादी के बाद पीड़िता ने पूरी घटना अपने पति को बताई। पति के सहयोग से उसने न्याय के लिए कदम उठाया। शुरुआत में पुलिस से मदद नहीं मिलने पर अदालत का सहारा लिया गया। जांच के दौरान मोबाइल डेटा और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपों को सही पाया और चार्जशीट दाखिल की।
जुर्माना न भरने पर बढ़ेगी सजा
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि राजीव गुप्ता जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे 28 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं प्रदीप मित्तल पर जुर्माना न देने की स्थिति में 16 महीने का अतिरिक्त कारावास लगाया जाएगा। अदालत ने अपने फैसले में इसे महिला के खिलाफ गंभीर अपराध मानते हुए सख्त सजा को जरूरी बताया।
