देहरादून: जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक पुनर्वास और आपदा राहत के क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा किए गए प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव के रूप में सामने आ रहे हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और संकल्प के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट उत्कर्ष को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं से पूर्ण रूप से सुसज्जित करना है।
डीएम सविन बंसल ने कहा कि इस पहल के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी बच्चा ज़मीन पर बैठकर पढ़ाई न करे। जिले के सरकारी स्कूलों में फर्नीचर, कक्षा-कक्षों में पर्याप्त रोशनी, कम से कम एक आउटडोर खेल सुविधा, लाइब्रेरी कॉर्नर, शुद्ध पेयजल के लिए आरओ और वाटर टैंक, पेयजल पाइपलाइन तथा आवश्यकता अनुसार विद्युतीकरण की व्यवस्था की गई है।
जिला योजना और खनिज न्यास से उपलब्ध धनराशि सीमित होने के कारण ओएनजीसी और हुडको से सीएसआर के तहत सहयोग लिया गया, जिसके अंतर्गत इन संस्थानों ने लगभग पाँच करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की। इसके परिणामस्वरूप प्राथमिक स्तर पर 15 से अधिक और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर पर 25 से अधिक विद्यार्थियों वाले सभी स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
शिक्षा के साथ-साथ जिला प्रशासन सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में भी सक्रिय है। डीएम ने बताया कि रायवाला में राजकीय नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत की गई है, जहां एम्स के साथ टाई-अप के माध्यम से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उपचार के बाद स्वस्थ हुए लाभार्थियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है। मरीजों के एम्स आने-जाने के लिए ओएनजीसी द्वारा एक एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई गई है।
आपदा प्रबंधन के तहत डीएम सविन बंसल ने बताया कि क्यारली गाड़ और सहस्त्रधारा क्षेत्र में आपदा प्रभावितों को एसडीआरएफ के मानकों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, कुछ सामाजिक और संवेदनशील एनजीओ द्वारा लगभग 55 प्रभावित परिवारों को 15 से 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का संकल्प है कि आपदा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को आगे भी हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नए आकलन और संसाधनों के आधार पर जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का कार्य लगातार जारी रहेगा।
