IIT Kanpur: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक अहम फैसला लिया है। बीते एक महीने से कम समय में आत्महत्या की दो घटनाओं के बाद संस्थान ने तय किया है कि सभी नए स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए कैंपस में पहले सप्ताह के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी।
संस्थान के अनुसार, स्क्रीनिंग के दौरान जिन छात्रों में अधिक मानसिक तनाव या परेशानी के संकेत मिलेंगे, उन्हें सबसे पहले प्रशिक्षित काउंसलर सहायता प्रदान करेंगे। जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सकों की मदद भी ली जाएगी, ताकि छात्रों को शुरुआत से ही सही मार्गदर्शन और देखभाल मिल सके।
हाल ही में 25 वर्षीय पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईश्वरम की कैंपस स्थित आवासीय भवन से गिरने के बाद मृत्यु हो गई थी। इससे पहले 29 दिसंबर को जैव विज्ञान और जैव इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के बीटेक छात्र जय सिंह मीना अपने हॉस्टल कमरे में मृत पाए गए थे। इन घटनाओं ने संस्थान प्रशासन को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपायों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
IIT कानपुर ने बताया कि वह एक संवेदनशील और सहयोगी कैंपस माहौल तैयार करने के लिए संकाय सदस्यों, छात्रों और कर्मचारियों के लिए नियमित जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। इनमें सुरक्षा गार्ड, डॉक्टर, पैरामेडिक्स, लाइब्रेरी स्टाफ, हॉस्टल प्रबंधन, मेस और सफाई कर्मी भी शामिल किए जा रहे हैं, ताकि संकट के संकेतों को समय रहते पहचाना जा सके।
इसके साथ ही संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के सहयोग से 24×7 आपातकालीन सहायता प्रणाली विकसित की है। छात्रों को जोड़ने और संवाद बढ़ाने के लिए वर्षभर कार्यक्रम, फेस्ट और विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जैसे आयोजन भी किए जाते हैं।
संस्थान में पीयर मेंटरिंग सिस्टम को औपचारिक रूप दिया गया है, जिसके तहत वरिष्ठ छात्र नए छात्रों को सहयोग देते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक के नेतृत्व में तीन अन्य मनोचिकित्सक और 10 प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक भी उपलब्ध हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके।
