नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में गुमशुदगी के मामलों को लेकर सामने आए नए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी 2026 में दर्ज मामलों के अनुसार, लापता होने वालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में लगातार ज्यादा बनी हुई है, जबकि उनकी बरामदगी की दर अपेक्षाकृत कम है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी महीने में कुल 1777 लोग लापता हुए, जिनमें 1116 महिलाएं और 661 पुरुष शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामलों में से अब तक सिर्फ 625 लोगों का ही पता चल पाया है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मिलने की दर काफी पीछे है, जिससे सुरक्षा और सामाजिक हालात पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डेटा यह भी दिखाता है कि अब भी बड़ी संख्या में लोग घर नहीं लौट सके हैं। कुल मामलों में लगभग दो-तिहाई लोग अभी भी लापता दर्ज हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक कारणों से भी जुड़ी हुई है।
हालांकि सालाना आधार पर देखें तो लापता होने वाले लोगों की कुल संख्या में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की जा रही है। बीते कुछ वर्षों में मामलों की संख्या कम हुई है, लेकिन बरामदगी का प्रतिशत उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाया है। यही वजह है कि पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी में गुमशुदगी से जुड़े मामलों में फ्री रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू है। जैसे ही किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलती है, तुरंत मामला दर्ज कर लिया जाता है। कई बार लोग वापस लौट आने पर इसकी जानकारी पुलिस को नहीं देते, जिससे आंकड़ों में असंतुलन दिखाई देता है। पुलिस ने यह भी साफ किया है कि महिलाओं या बच्चों की तस्करी से जुड़ा कोई संगठित गिरोह सक्रिय होने की पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने राजधानी की कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र और दिल्ली की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हर दिन बड़ी संख्या में लोग लापता हो रहे हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर लापता मामलों की गहन जांच और विशेष टास्क फोर्स के गठन की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रहे आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग, पारिवारिक संवाद और समय पर सूचना साझा करना—इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना जरूरी है, ताकि लापता होने वाले लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
