India–US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने अपने आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा जारी कर दिया है। इस फ्रेमवर्क के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जारी संयुक्त बयान के अनुसार अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती की है, जबकि भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टरों में अपने हितों की पूरी तरह सुरक्षा बरकरार रखी है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय MSMEs, टेक्सटाइल, रबर, केमिकल, ज्वेलरी और मशीनरी सेक्टर को बड़ा बाजार मिलेगा। जेनेरिक दवाओं, डायमंड और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ 0% कर दिया गया है।
भारत पर पिछले साल लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी 7 फरवरी 2026 से हटा लिया जाएगा, क्योंकि भारत ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह रूस से तेल खरीद को सीमित रखेगा और आने वाले वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाएगा। अगर भारत भविष्य में फिर से रूसी तेल की खरीद बढ़ाता है, तो अमेरिका दोबारा अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है।
भारत ने गेहूं, चावल, दूध, पनीर, पोल्ट्री और अन्य कृषि उत्पादों पर किसी भी समझौते से साफ इनकार किया है। भारत का कहना है कि यह कदम किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
फ्रेमवर्क के तहत दोनों देश सप्लाई चेन को मजबूत करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और डिजिटल व्यापार को सरल बनाने पर भी काम करेंगे। साथ ही अगले 5 साल में भारत अमेरिका से ऊर्जा, मेटल, टेक्नोलॉजी और विमानन क्षेत्र से जुड़े करीब 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा।
सरकार का मानना है कि इस समझौते से लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए। वहीं MSMEs और स्टार्टअप्स को भी अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
