नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा सचिवालय को नोटिस सौंपा है। यह कदम नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न दिए जाने के आरोपों के बीच उठाया गया है। हालांकि, इस नोटिस पर स्वयं राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं।
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए नेता प्रतिपक्ष का स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना गया। इसी कारण राहुल गांधी ने इस नोटिस से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
नोटिस में विपक्ष ने आरोप लगाया है कि लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं और सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता का पालन नहीं किया जा रहा। विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह नोटिस दिया है और स्पीकर पर खुले तौर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने पर आठ सांसदों को मनमाने ढंग से पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप के. सुरेश ने विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा। हालांकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद इस पहल का हिस्सा नहीं बने और उन्होंने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप भी शामिल हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया था, जिसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोका गया।
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के उस बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को सुरक्षा कारणों से टालने की बात कही थी। विपक्ष का दावा है कि कांग्रेस सांसदों पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और सदन के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
