हेट स्पीच गाइडलाइन पर सुनवाई से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने नई निष्पक्ष याचिका दाखिल करने को कहा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक नेताओं के भाषणों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी समाज में सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है। कोर्ट ने राजनीतिक भाषणों के लिए व्यापक दिशानिर्देश तय करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को नई, व्यापक एवं निष्पक्ष याचिका दायर करने की सलाह दी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने की।
याचिका में क्या था मुद्दा?
याचिका शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा समेत 12 लोगों की ओर से दायर की गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी कि कुछ राजनीतिक भाषण सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्देश्य किसी एक नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए गाइडलाइन बनवाना है।
याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कथित भाषणों का संदर्भ भी दिया गया था।
कोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने मौजूदा याचिका को सीमित दायरे की बताते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक दल के कुछ व्यक्तियों पर केंद्रित प्रतीत होती है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि यदि व्यापक दिशानिर्देश की मांग है, तो याचिका को निष्पक्ष और समग्र रूप में पेश किया जाए, जिसमें सभी दलों और प्रणालीगत पहलुओं का उल्लेख हो।
जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि “राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाने का काम करना चाहिए।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अदालत दिशानिर्देश तय भी कर दे, तो उनके प्रभावी अनुपालन की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होगी।
जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत आदेश दे सकती है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की चुनौती अलग है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हेट स्पीच के मुद्दे पर शीर्ष अदालत पहले ही कई सिद्धांत स्थापित कर चुकी है।
आगे क्या?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह एक व्यापक और निष्पक्ष याचिका पर विचार करने को तैयार है। फिलहाल याचिकाकर्ताओं को संशोधित याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है।
इस टिप्पणी को राजनीतिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम जवाबदेही के संतुलन पर महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
