देहरादून- प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में लोक सँस्कृति विरासत उत्सव के संरक्षक डा0के पी जोशी ने कहा देहरादून में 27मार्च से शोसल बलूनी स्कूल में उत्सव का आयोजन किया जा रहा है,जिसमें उत्तराखँड के सीमान्त जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन मँच पर करैंगे। हमारे उत्तराखँड की कला,सँस्कृति,और परिधानों से सुसज्जित कलाकारों को आमँत्रण दिया गया है। 250कलाकारों के ठहरनै, खाने की ब्यवस्था की गयी है।इस आयोजन में 7राज्यों से कलाकार आ रहे हैं।जिसमें,हरियाणा,पँजाब,कशमीर,राजस्थान,उत्तर प्रदेश,और उत्तराखँड हैं।गढ़वाल क्षेत्र में प्रसिद्व पाँडव नृत्य का मंचन और पँजाब के भाँगडा़ नृत्य से भी भरपूर मनोरँजन होगा।सभी आमँत्रित राज्य अपने राज्य के प्रसिद्व नृत्य एवँ कला का प्रदर्शन करैंगे।
उत्तराखँड के 13जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों के कलाकार,ढोल,दमाँऊ,और मसकबीन,वाधों से उत्सव में चार चाँद लगाऐंगे,हमारी आज की पीढी़ हमारे पारँपरिक वाध यँत्रों और कला सँस्कृति की जानकारी इस आयोजन में आकर ले सकती है।हमारे पारँपरिक परिधान,नथुली,बुलाक,गुलबँद,इन सबको पहनना हमारी पहचान है। पुरानै जमाने की महिलाऐं शरीर पर अलग अलग सुन्दर निशान गुदवाती थी जिसे आज टैटू कहते हैं।हमारी सँस्कृति और परिधान पौराणिक काल से बहुत विकसित थी।जोशी ने कहा आज इन सब धरोहरों को सँवारनै और सँजोनै की जरूरत है ताकि हमारी सँस्कृति और पहचान नयी पीढी। जान सके समझ सके।
