नई दिल्ली – देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिक के मामले में अहम हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़ी याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर जल्द सुनवाई की जाए। यह मामला करीब नौ साल से लंबित बताया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए मामले को गंभीर माना। अदालत ने उच्च न्यायालय से कहा कि 77 वर्षीय बुजुर्ग की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और शीघ्र निर्णय लिया जाए।
यह याचिका राम शंकर नामक सेवानिवृत्त कर्मचारी की ओर से दायर की गई है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में वर्षों तक सेवा दी थी। बाद में उन्होंने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में भी काम किया। उनका कहना है कि पेंशन उनके जीवनयापन का अधिकार है, जिसे लंबे समय से रोका गया है।
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है। लंबे समय से न्याय न मिलने को उन्होंने अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
बताया गया कि वर्ष 2017 में दायर यह मामला अब तक लंबित था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि जल्द ही इस पर फैसला हो सकेगा और बुजुर्ग को उनका हक मिल पाएगा।