नई दिल्ली- देश में शराब की बिक्री और उसकी पैकेजिंग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि टेट्रा पैक, छोटे पाउच और सैशे जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से जवाब तलब किया और याचिका पर विचार करने के लिए सहमति जताई।
यह जनहित याचिका संगठन “कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग” की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विपिन नायर ने अदालत में दलील दी कि मौजूदा एक्साइज नियमों में शराब की बोतलों की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने से कंपनियां भ्रामक पैकेजिंग का इस्तेमाल कर रही हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि कई कंपनियां शराब के पैक पर फलों की तस्वीरें लगाकर उसे जूस जैसा दिखाती हैं, जबकि अंदर वोदका या अन्य शराब होती है। इससे खासकर बच्चों और युवाओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। याचिका में कहा गया है कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति बनाए। साथ ही टेट्रा पैक और जूस जैसी दिखने वाली पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएं।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि राज्यों के एक्साइज कानूनों और नीतियों में संशोधन कर बॉटलिंग की एक समान परिभाषा तय की जाए। उनका कहना है कि शराब केवल कांच की बोतलों या स्पष्ट रूप से अलग दिखने वाले कंटेनरों में ही बेची जानी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाया जा सके।