नई दिल्ली — पटियाला हाउस कोर्ट में सोमवार को बाबा चैतन्यानंद सरस्वती की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सरस्वती पर 17 छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप है और वे न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत नहीं दी और अगली सुनवाई की तारीख 27 अक्टूबर तय की है।
अदालत में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि चैतन्यानंद को जानबूझकर झूठे आरोपों में फंसाया गया है। बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि छात्राओं को धमकाकर बयान दिलवाए गए हैं और उनकी छात्रवृत्तियां रद्द करने की धमकी दी गई थी। वकील ने कहा कि सारे आरोप निराधार हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीप्ति देवेश ने बचाव पक्ष की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप कह रहे हैं कि आरोप झूठे हैं, लेकिन शिकायत करने वाली छात्राओं की संख्या 17 है। एक-दो को बहकाया जा सकता है, लेकिन सभी को कैसे राजी किया जा सकता है?”
बचाव पक्ष ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 232 (झूठी गवाही के लिए धमकाना) को छोड़कर अन्य सभी आरोप जमानती हैं। उनका तर्क था कि यह धारा भी जांच के दौरान बाद में जोड़ी गई और इसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। वकील ने यह भी कहा कि सरस्वती, जो एक निजी प्रबंधन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष हैं, को अपराध से जोड़ने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि आरोपों में कहा गया है कि होली के मौके पर सरस्वती ने छात्राओं पर रंग डाला और उनसे हाथ मिलाया। उन्होंने कहा कि यह यौन उत्पीड़न के दायरे में नहीं आता। इस पर न्यायाधीश ने जवाब दिया, “जब 17 पीड़ितों ने एक जैसे बयान दिए हैं, तो क्या ये सबूत नहीं हैं?”
कार्यवाही के दौरान निजी संस्थान के वकील ने बताया कि मामले की शुरुआत तब हुई जब भारतीय वायु सेना की एक महिला ग्रुप कैप्टन ने एक ईमेल के ज़रिये सरस्वती के खिलाफ शिकायत दी थी।
जांच अधिकारी (IO) ने कोर्ट को बताया कि पीड़ितों के व्हाट्सएप चैट गायब हैं क्योंकि उनके फोन में “डिसअपेयरिंग मैसेज” फीचर सक्रिय था। सिर्फ चैट के स्क्रीनशॉट ही उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तीन महिलाएं छात्राओं को चैट डिलीट करने के लिए मजबूर कर रही थीं। अदालत ने जब पूछा कि इन महिलाओं को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो IO ने बताया कि उन्हें केवल “बंधक” बनाकर रखा गया था।
