Cyber Fraud in Jaipur: जयपुर में साइबर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक रिटायर्ड अधिकारी से 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपती को फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी और कई दिनों तक कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
मामला जयपुर के झोटवाड़ा इलाके का है। पीड़ित के अनुसार 18 जनवरी की सुबह उन्हें व्हाट्सएप पर कॉल आया। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल कर खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया और Supreme Court of India के नाम से फर्जी अरेस्ट वारंट और फंड फ्रीजिंग नोटिस दिखाकर उन्हें डराया। ठगों ने दावा किया कि उनके मोबाइल सिम का इस्तेमाल अवैध वीडियो से जुड़ी गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ गंभीर केस दर्ज हो सकता है।
ठगों ने दंपती को “डिजिटल अरेस्ट” का हवाला देकर लगातार कॉल पर बनाए रखा और किसी से संपर्क करने से मना कर दिया। कई बार कॉल 8 से 10 घंटे तक चलती रही। बातचीत के दौरान ठगों को यह भी पता चल गया कि दंपती जयपुर में अकेले रहते हैं और उनका बेटा Bengaluru में रहता है। इसके बाद आरोपियों ने बेटे के खिलाफ भी कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें और ज्यादा डरा दिया।
डर के चलते दंपती ने अपनी जीवनभर की बचत एफडी तोड़कर ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी। अलग-अलग बैंकों में कुल 1.06 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा करवाई गई। इनमें Axis Bank, Yes Bank, Bank of Baroda और ICICI Bank के खातों में पैसे भेजे गए।
जांच में सामने आया कि पहले चरण में रकम फर्जी खातों में जमा करवाई गई और बाद में करीब 31 से अधिक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर दी गई। कुछ राशि एटीएम से निकाली गई, जबकि बड़ी रकम विदेश भेजकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर दी गई।
जब पीड़ित ने यह जानकारी अपने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को दी, तब उन्हें ठगी का अंदेशा हुआ। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। साइबर क्राइम ब्रांच ने 3 फरवरी को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, ओटीपी या निजी जानकारी साझा न करें। ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
