मसूरी। जौनपुर-रंवाई क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर मसूरी टाउन हॉल में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे को व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा और आगामी दिनों में क्षेत्रभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जौनपुर-रंवाई की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियां जौनसार-बावर क्षेत्र से काफी हद तक मेल खाती हैं। इसके बावजूद आज तक इस क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में कोई निर्णय लेती है तो उसका लाभ पूरे जौनपुर-रंवाई क्षेत्र के लोगों को मिलना चाहिए, न कि किसी सीमित हिस्से को।
पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि एसटी दर्जे की मांग को मजबूत आधार देने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों, सामाजिक तथ्यों और विशेषज्ञों की राय को एकत्रित कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों का भी सहयोग लिया जाएगा।
जौनपुर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रदीप कवि और जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह रावत ने कहा कि यह केवल आरक्षण का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जनसमर्थन बढ़ाने के लिए गांव-गांव बैठकें आयोजित की जाएंगी और जल्द ही महापंचायत की तिथि घोषित की जाएगी।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी क्षेत्र या समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत पूरी होती है। इसके लिए केंद्र सरकार की अनुशंसा, संसद की मंजूरी और अंत में राष्ट्रपति की अधिसूचना आवश्यक होती है।
वक्ताओं ने कहा कि जौनपुर-रंवाई को एसटी सूची में शामिल करने की मांग नई नहीं है। पिछले कई दशकों से सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं। समय-समय पर राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपे गए, जनसभाएं आयोजित की गईं और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपने चुनावी घोषणापत्रों में इस विषय का उल्लेख किया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
बैठक में मौजूद लोगों ने उम्मीद जताई कि सरकार क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस लंबे समय से लंबित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।