नई दिल्ली- यमुना नदी के फ्लडप्लेन से जुड़ा मामला एक बार फिर सख्त रुख के साथ सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) को निर्देश दिया है कि वह यमुना के डूब क्षेत्र में मौजूद अपनी सभी गतिविधियां तय समयसीमा के भीतर समाप्त करे। अदालत ने 31 मार्च 2026 तक का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया है कि इसके बाद इस इलाके में डीएमआरसी की किसी भी तरह की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि बैचिंग प्लांट और कास्टिंग यार्ड जैसे निर्माण से जुड़े ढांचे पूरी तरह हटाए जाएं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद क्षेत्र खाली न किया जाना चिंता का विषय है।
हालांकि, डीएमआरसी की भूमिका को शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट से जुड़ा मानते हुए अदालत ने विशेष परिस्थिति में समय बढ़ाने की अनुमति दी। कोर्ट ने साफ किया कि यह छूट केवल एक बार के लिए है और तय समय के बाद किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि निर्माण सामग्री हटने के बाद यमुना फ्लडप्लेन को उसके प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाया जाए। इसके लिए बागवानी और वन विभाग की मदद ली जाएगी। किसी भी प्रकार का मलबा, कचरा या मशीनरी का हिस्सा मौके पर नहीं छोड़ा जाएगा।
काम पूरा होने के बाद संबंधित जमीन को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को सौंपा जाएगा। डीडीए को निर्देश दिया गया है कि वह 10 अप्रैल 2026 तक अदालत में अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
