Ghuskhoor Pandat Name Controversy: अभिनेता मनोज बाजपेयी से जुड़ी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर उठे विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट में अहम घटनाक्रम सामने आया है। फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया कि विवादित शीर्षक और उससे जुड़ी प्रचार सामग्री वापस ले ली गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि फिल्म का नया नाम अभी तय नहीं हुआ है और भविष्य में रखा जाने वाला शीर्षक पुराने नाम से मिलता-जुलता नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्माता के इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए फिल्म के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया। इससे पहले न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने शीर्षक को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किसी वर्ग या समुदाय को बदनाम करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अपने हलफनामे में नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जो आपराधिक जांच की कहानी पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उनका और न ही उनके प्रोडक्शन हाउस का किसी धर्म, समुदाय या नागरिक की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा था।
यह विवाद फिल्म के टीजर रिलीज के बाद शुरू हुआ था। ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के पदाधिकारी द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म का शीर्षक जातिगत रूढ़ियों को बढ़ावा देता है और समुदाय की भावनाओं को आहत करता है।
अब शीर्षक बदलने के आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया है।
