Breaking News
शानदार टीमवर्क से जीता दिल, विक्रम-अजिंक्य ने अपने नाम की मास्टरशेफ इंडिया की ट्रॉफी
शानदार टीमवर्क से जीता दिल, विक्रम-अजिंक्य ने अपने नाम की मास्टरशेफ इंडिया की ट्रॉफी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख को हाईकोर्ट से राहत, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार
छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख को हाईकोर्ट से राहत, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी
चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार- महाराज
चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार- महाराज
टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्र- सीएम
टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्र- सीएम
घर से ही शुरू होगा महिला सशक्तिकरण- रेखा आर्या
घर से ही शुरू होगा महिला सशक्तिकरण- रेखा आर्या
95 बीघा जमीन का सौदा कर लिया एडवांस, बैनामा मांगने पर दी जान से मारने की धमकी
95 बीघा जमीन का सौदा कर लिया एडवांस, बैनामा मांगने पर दी जान से मारने की धमकी

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा बाउल कैंसर, विशेषज्ञों ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को बताया बड़ा खतरा

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा बाउल कैंसर, विशेषज्ञों ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को बताया बड़ा खतरा

दुनियाभर में गंभीर और लंबी चलने वाली बीमारियों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है, और विशेषज्ञ इसके लिए बदलती जीवनशैली व अनियमित खानपान को मुख्य कारण मानते हैं। कैंसर के बढ़ते मामले स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। हर वर्ष कैंसर और हृदय रोग से सबसे अधिक मौतें दर्ज की जाती हैं। हालिया अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि युवाओं में कैंसर के मामले पहले की तुलना में कई गुना बढ़ रहे हैं, जो आने वाले समय में गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।

पिछले बीस वर्षों में दुनिया में कैंसर के मामलों की संख्या में लगातार उछाल देखा गया है। खासकर बाउल यानी कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1990 में जहां इसके 8.4 लाख नए केस सामने आए थे, वहीं 2019 तक यह संख्या बढ़कर 2.1 मिलियन तक पहुंच गई। तेज़ी से बढ़ता यह आंकड़ा इसे दुनिया के सबसे तेजी से फैलने वाले कैंसरों में रखता है।

एक नई रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब भोजन आदतें, विशेष रूप से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का बढ़ा सेवन, बाउल कैंसर के जोखिम को तेजी से बढ़ा रहा है। लोगों से इस खतरे को गंभीरता से लेने और खानपान को सुधारने की सलाह दी गई है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का अनुमान है कि 2040 तक हर साल लगभग 3.2 करोड़ नए बाउल कैंसर के मरीज सामने आ सकते हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव डाल सकते हैं। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है—2022 में करीब 64,863 नए मरीज और 38,367 मौतें दर्ज की गईं। खास बात यह है कि शहरी क्षेत्रों में यह दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी ज्यादा है। इसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली, पैकेज्ड फूड की बढ़ती खपत और शारीरिक गतिविधियों की कमी है।

हालिया शोध में यह पाया गया है कि 50 वर्ष से कम उम्र की वे महिलाएँ जो नियमित रूप से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाती हैं, उनमें बाउल पॉलिप बनने की संभावना अधिक होती है—जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में फाइबर कम और इमल्सीफायर अधिक होते हैं, जिससे लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। कैंसर रिसर्च यूके और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट ने लोगों को ऐसे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की सलाह दी है।

अध्ययन में पाया गया कि ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन करने वालों में बड़ी आंत या रेक्टम की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि का जोखिम लगभग 45% तक अधिक था। हालांकि पॉलिप हमेशा खतरनाक नहीं होते, लेकिन कई मामलों में ये कैंसर में बदल सकते हैं।

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के विशेषज्ञ और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. एंड्रयू चैन ने कहा कि कम उम्र के लोगों में बाउल कैंसर के बढ़ते मामलों की वजह अब तक स्पष्ट रूप से समझ नहीं आ पा रही थी। उनके अनुसार, व्यायाम की कमी, गट माइक्रोबायोम में बदलाव और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड मिलकर इस खतरे को और बढ़ा सकते हैं।

वर्तमान समय में औसत व्यक्ति की कुल कैलोरी का लगभग 35% हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों—जैसे ब्रेड, रेडी-टू-ईट नाश्ते, सॉस, स्प्रेड और मीठे पेय—से आता है।

बाउल कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण आम पेट की समस्याओं जैसे महसूस होते हैं, जिससे लोग समय से डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते और पता चलने तक बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। देर से पता चलने पर इलाज मुश्किल हो जाता है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। तली-भुनी चीजें, अधिक वसा, मोटापा, धूम्रपान और शराब जैसी आदतें भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाती हैं।

Back To Top