नई दिल्ली- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली साइबर थाना पुलिस ने केवाईसी के बहाने लोगों को ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जामताड़ा और पश्चिम बंगाल से जुड़े इस नेटवर्क के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे।
पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़ा डेटा, लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड, एक्सेल शीट और संदिग्ध एपीके फाइलें बरामद की गई हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी पीड़ितों के मोबाइल में खतरनाक एप इंस्टॉल कराकर फोन को रिमोट एक्सेस में ले लेते थे और फिर उनके खातों से धोखाधड़ी करते थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सागरपुर निवासी एक महिला ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर कहा गया कि अगर तुरंत केवाईसी अपडेट नहीं की गई तो बैंक खाता बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद उसे एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो गया।
आरोपियों ने पीड़िता की बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग करते हुए उसके नाम पर फर्जी लोन आवेदन कर दिया। कुछ दिनों बाद जब पीड़िता को बैंक से मैसेज मिले, तब उसे ठगी का पता चला। इस मामले में करीब 8.30 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल सर्विलांस के जरिए आरोपियों की लोकेशन धनबाद में ट्रेस की गई। छापेमारी के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी खेतों के बीच अस्थायी ठिकाने बनाकर साइबर ठगी का संचालन कर रहे थे। मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि चौथे आरोपी को बाद में पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से पकड़ा गया।
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी एप डाउनलोड करने के लिए उकसाते थे। इसके बाद खातों की जानकारी चुराकर धोखाधड़ी से लोन लेते और रकम को म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कर एटीएम और पीओएस मशीनों के जरिए निकाल लेते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पेशे अलग-अलग हैं, लेकिन सभी मिलकर संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी से जुड़े खातों की जांच कर रही है।
